यूं तो बढ़ती जनसंख्या को कोई बड़ी उपलब्धि नहीं माना जाता, लेकिन हिन्दुस्तान का दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाना चीन के लिए चिढ़ने की वजह बन गया है। दरअसल कल आये आंकड़ों के बाद जब चीन के विदेश मंत्रालय से पूछा गया कि इंडिया अब चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़े पॉपुलेशन वाला देश बन गया है, इस पर चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत का नाम लिए बिना तंज कसा कि आबादी का फायदा सिर्फ जनसंख्या बढ़ाने से ही नहीं मिलता है बल्कि इसके लिए उस आबादी में क्वालिटी भी होनी चाहिए। चीन ने कहा कि अभी उसके पास 900 मिलियन यानी कि 90 करोड़ लोगों का वर्कफोर्स है जो चीनी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में सक्षम है।

दरअसल संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार कल भारत की आबादी 142.86 करोड़ थी। चीन अब 142.57 करोड़ की जनसंख्या के साथ दूसरे नंबर है। लिहाजा चीन के कहा है कि जनसंख्या से होने वाला फायदा क्वांटिटी पर ही नहीं बल्कि गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है, उन्होंने कहा कि जनसंख्या तो अहम है लेकिन इसके साथ टैलेंट भी होना बहुत जरूरी है। + माना जा रहा है कि चीन अपनी बुजुर्ग हो रही जनसंख्या से पैदा होने वाली समस्या से निपटने के लिए भी कोशिशें कर रहा है।

चीन को पॉपुलेशन डिविडेंड खोने का खतरा

दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने की वजह से चीन सालों तक पॉपुलेशन डिविडेंड का फायदा लेता रहा है। उसे कम कीमत पर अच्छे और क्वालिटी श्रमिक मिलते रहे। उसे कभी मजदूर, हाईटेक लेबर, डॉक्टर, इंजीनियर की कमी नहीं रही । लेकिन बढ़ते जीवन दर, बुजुर्ग होती आबादी, सालों तक चली वन चाइल्ड पॉलिसी की वजह से चीन की आबादी पहले तो कई सालों तक स्थिर रही और अब घटने लगी है लिहाजा चीन को अपने पॉपुलेशन डिविडेंड के खत्म होने का डर सता रहा है।

बूढ़ा होने लगा है चीन

गौरतलब है कि भारत में मीडियन एज 29 है, यानी आबादी का लगभग आधा हिस्सा 29 साल से कम उम्र का है। यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड के मुताबिक, भारत में 68% लोग 15 से 64 साल तक की उम्र के हैं। यही वो आबादी से जिसे कामकाजी माना जाता है। वहीं चीन बूढ़ा होने की राह पर है। चीन की मीडियन एज 39 साल है। अगले 27 सालों में यानी 2050 तक उसकी मीडियन एज 51 हो इसके साथ ही वर्क फोर्स को लेकर चीन की समस्या शुरू होगी।