भोपाल: वन मंत्री विजय शाह के निर्देश पर शाजापुर वन मंडल में सामग्री प्राप्त किए बिना ही प्रदायकर्ता फर्म को करीब ₹50 लाख का भुगतान करने के मामले में जांच शुरू हो गई है. वर्तमान एपीसीसीए एवं पदेन सीएफ मनोज अग्रवाल ने शाजापुर डीएफओ जांच की जिम्मेदारी सौंपी है. जांच की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है. सूत्रों का कहना है कि एक वरिष्ठ अधिकारी एसडीओ-रेंजर के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं.

उज्जैन सर्किल के शाजापुर वन मंडल में रिटायर्ड डीएफओ जाम सिंह भार्गव द्वारा सामग्री प्राप्त किए बिना एसडीओ और रेंजर कथित दस्तावेज आधार बनाकर 50 लाख का भुगतान किए जाने के मामले की जांच शुरू हो गई है. इस आशय की पुष्टि उज्जैन सर्किल में पदस्थ एपीसीसीएफ एवं पदेन सीएफ मनोज अग्रवाल ने की है.

अग्रवाल ने बताया कि डीएफओ शाजापुर को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है. जबकि डीएफओ शाजापुर मयंक चांडीवाल ने बताया कि अभी तक पद एनसीएफ अग्रवाल का जांच से संबंधित कोई पत्र नहीं मिला है. पत्र मिलते ही जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाएगी.

क्या है मामला-

वन मंडल के डीएफओ रहे जामसिंग भार्गव 31 जनवरी को रिटायर हो गए थे. रिटायरमेंट के 15 दिन पहले तत्कालीन डीएफओ रामसिंह भार्गव ने  टेंडर किए बिना ही टुकड़े-टुकड़े में ₹50 लाख के चैनलिंक खरीदी के आर्डर कर दिए थे. 31 जनवरी को रिटायर होना था और 30 जनवरी को सामग्री प्राप्त किए बिना ही प्रदाय कर्ता फर्म को ₹50 लाख का भुगतान कर दिया.

डीएफओ ने यह भुगतान एसडीओ अंकित जामोड और रेंजर सिब कुमार मैथानी द्वारा बिना भौतिक सत्यापन के तैयार किए गए बाउचर के आधार पर कर दिया. सूत्रों का कहना है कि  डीएफओ के दबाव में आकर एसडीओ और रेंजर ने सामग्री की सत्यापन किए बिना ही कागजों पर भुगतान के लिए बाउचर डीएफओ के समक्ष प्रस्तुत कर दिया था.

ऐसे हुआ मामला उजागर-

डीएफओ जामसिंग भार्गव के रिटायरमेंट के बाद से 18 अप्रैल तक शाजापुर डीएफओ के पद पर किसी की भी पदस्थापना नहीं हुई. इस बीच शाजापुर डीएफओ का प्रभार उज्जैन डीएफओ को दिया गया. उज्जैन डीएफओ ने बतौर प्रभारी डीएफओ शाजापुर मैदानी दौरा और कार्यालय में सरकारी दस्तावेज के पन्ने पलटे तब यह मामला उजागर हुआ.

मामला संज्ञान में आते ही तत्काल दो पत्र तत्कालीन सीसीएफ उज्जैन कोमोलिका मोहंता को  लिखे. चूंकि मोहंता काफी पहले ही उज्जैन सर्किल से इंदौर पदस्थ करने के लिए विभाग के मुखिया को पत्र लिख चुकी थी. इसलिए उन्होंने प्रभारी डीएफओ के पत्र को गंभीरता से नहीं लिया. मामला गंभीर था, इसलिए प्रभारी डीएफओ ने एसडीओ और रेंजर पर कार्रवाई करने का दबाव बनाया तब कहीं जाकर गुणवत्ता से विपरीत माल प्रदान किया गया.

इनका कहना है-

मैंने मामले को गंभीरता से लिया है. जांच के लिए शाजापुर डीएफओ को पत्र लिख दिए है. डीएफओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.

"मनोज अग्रवाल, एपीसीसीएफ उज्जैन सर्किल"