राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया और कभी अच्छे दोस्त हुआ करते थे लेकिन अब एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंदी बन गए हैं। बदले हुए हालातों में भी राहुल गांधी और सिंधिया एक दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी से बचते ही नज़र आये थे मगर दोनों के बीच सियासी मतभेद अब मनभेद में बदलता नज़र आ रहा है। 

सिंधिया और गांधी परिवार की दोस्ती दो पीढ़ियों तक चली। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया की दोस्ती ने देश की राजनीति में अपना कद बढ़ाया। राजीव गांधी की हत्या और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया की आकस्मिक मृत्यु के बाद, राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच दोस्ती परवान चढ़ी। दोनों ने दून स्कूल से पढ़ाई की। दोनों स्कूल के दिनों में दोस्त भी बने थे। इसके बाद धीरे-धीरे दोनों ने राजनीति में साथ कदम रखा।

राहुल गांधी और ज्योतिराज सिंधिया जब लोकसभा जाते थे तो अक्सर एक ही पोशाक पहनकर सदन में प्रवेश करते थे। इसके अलावा दोनों अगल-बगल बैठते हैं। जब भी राहुल गांधी पर हमला हुआ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सबसे पहले जवाब दिया। हालांकि अब दोनों एक दूसरे के कटु राजनीतिक शत्रु बन गए हैं। सियासी पैंतरेबाज़ी के बीच दोनों एक-दूसरे पर वार करना नहीं भूल रहे हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया और राहुल गांधी की दोस्ती तब खत्म हुई जब ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल हो गए और कमलनाथ सरकार को धूल चटा दी। इसके बाद कुछ समय तक तो ज्योतिरादित्य सिंधिया और राहुल गांधी ने सीधे तौर पर एक-दूसरे पर हमला नहीं किया, लेकिन जब 'भारत जोड़ो यात्रा' निकली तो राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बयानबाजी की।

इसके बाद सिंधिया ने भी राहुल गांधी पर राजनीतिक हमला बोलने से नहीं हिचकिचाया। मौजूदा स्थिति सबके सामने है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक हमलों में राहुल गांधी सबसे आगे हैं, वहीं मध्य प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ बयानबाजी को लेकर कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया पर लगातार निशाना साध रही है। अब राजनीति में सिंधिया और गांधी की राजनीतिक दुश्मनी की मिसाल दी जा रही है।