भोपाल: राज्य के जल संसाधन विभाग की स्वीकृत 41 परियोजनाओं के लिये राज्य सरकार के पास धन का संकट आ गया है। ये परियोजनायें कुल 1793 करोड़ रुपयों की हैं। अब इन्हें पूरा करने के लिये राज्य सरकार ने केंद्र सरकार का मुंह ताका है।

राज्य सरकार का इन परियोजनाओं के लिये साफ तौर पर कहना है कि कोविड महामारी के कारण टैक्स रेवेन्यु में कमी आई है और सरकार पर वेतन, पेंशन और कर्ज पर ब्याज के भुगतान का अनिवार्य दायित्व है।

इसलिये उसे केंद्र से आर्थिक सहायता की सख्त जरुरत है। जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता बजट ने अपने सभी कार्यपालन यंत्रियों को पत्र जारी कर कहा है कि वे विभाग की उक्त निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिये केंद्र सरकार की विशेष सहायता योजना के प्रस्ताव तैयार करें।

इन निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिये है धन का संकट :

41 निर्माणाधीन परियोजनायें वर्ष 2023 से वर्ष 2030 तक पूरी होनी है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं : बण्डा जिला सागर, बरखेड़ा जिला धार, चिता खुदरी जिला जबलपुर, हनौता जिला सागर, हिरन जिला जबलपुर, मेघा जिला बैतूल, नईगढ़ी जिला रीवा, पार्वती रिन्सी जिला राजगढ़, रामनगर जिला सतना, सीप अम्बर जिला सीहोर, शामगढ़ सुवासरा जिला मंदसौर, सुठालिया जिला राजगढ़, सीतानगर जिला दमोह, टेम जिला विदिशा, पेंच जिला छिन्दवाड़ा, पंचमनगर जिला दमोह, मोहनपुरा जिला राजगढ़, कुण्डलिया जिला राजगढ़, चंदेरी जिला शिवपुरी, कठान जिला छतरपुर, छिन्दवाड़ा इरीगेशन जिला छिन्दवाड़ा, केन बेतवा लिंक जिला पन्ना-छतरपुर, असन बैराज जिला मुरैना, पवई जिला पन्ना, भाम राजगढ़ जिला खण्डवा,  कंदन जिला सागर, सतधारा जिला दमोह, अनवलिया जिला खण्डवा, रुन्झ जिला पन्ना, हिरवार माईक्रो जिला शहडोल, परकुल जिला सागर, कर्रम जिला धार, पारसडोह जिला बैतूल, अपचन्द जिला सागर, गोघरी जिला बैतूल, निर्गुन जिला बैतूल, सरकुला जिला शिवपुरी, वर्धा जिला बैतूल, बनी हरबखेड़ी, समकोता बैराज तथा माईनर स्कीम।