महाराष्ट्र सरकार नरीमन प्वाइंट पर प्रतिष्ठित एयर इंडिया भवन खरीदने और इसे मंत्रालय विस्तार में बदलने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार ने एआई एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड, जो भवन का मालिक है, उसे रुपये का भुगतान किया है। सैद्धांतिक रूप से 1,600 करोड़ रुपये के अंतिम प्रस्ताव पर सहमति बनी थी।

उद्धव सरकार ने 1450 करोड़ का ऑफर दिया था

अधिकारियों ने कहा कि पिछली सरकार ने इसके लिए करीब 1,450 करोड़ की पेशकश की थी। एक अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय के कार्यालयों को एआई भवन में स्थानांतरित किया जा सकता है और निजी भवनों में सभी कार्यालयों को मंत्रालय में समायोजित किया जा सकता है।

सशर्त पेशकश के बाद ही सौदा होगा

डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की थी और महाराष्ट्र सरकार से इसे बेचने के प्रयास को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था।

उन्होंने कहा कि “एआई एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड हमें देने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है। कुछ और विवरणों पर काम किया जाएगा लेकिन हमारा प्रस्ताव सशर्त है। हमें बताया गया कि जीएसटी और आई-टी विभाग के कार्यालय हैं। हम डील पर तभी आगे बढ़ेंगे जब हमें खाली भवन का पजेशन मिलेगा।

2,000 करोड़ से अधिक मूल्य!

एयर इंडिया के अधिकारियों ने राज्य सरकार को बताया था कि उनके अनुसार इमारत की लागत 2,000 करोड़ रुपये से अधिक थी। राज्य के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार ने एयर इंडिया से करीब 100 करोड़ रुपये जुटाए हैं। सरकार तो 300 करोड़ की बकाया राशि भी एयरइंडिया से वसूलने हैं।

यह प्रक्रिया 2021 में शुरू हुई थी

अधिकारी ने कहा कि फडणवीस ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान भवन के लिए बातचीत शुरू की थी, एमवीए सरकार के तहत 2021 में वार्ता फिर से शुरू की गई थी, लेकिन कोई सौदा तय नहीं हुआ था।

क्यों खास है एयर इंडिया की बिल्डिंग?

यह भव्य भवन नरीमन प्वाइंट पर मंत्रालय के पास स्थित है। 1993 के सिलसिलेवार धमाकों में भी इस इमारत को आतंकवादियों ने निशाना बनाया था। भारी आर्थिक संकट से गुजर रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एयर इंडिया ने इस 23 मंजिला इमारत को साल 2018 में बेचने का फैसला किया था।

तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। इसका मकसद मंत्रालय के काम को एक छत के नीचे लाना था। खरीद की बात चल ही रही थी कि विधानसभा का चुनाव हुआ जिसमें सत्ता परिवर्तन हो गया और सौदा आगे नहीं बढ़ सका। अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार ने एक बार फिर खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।