संसद के नए भवन का उदघाटन कल होने जा रहा है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भवन का पहला वीडियो शेयर किया है। इसमें संसद की भव्यता को दिखाया गया है। यह भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। सदन में हर सांसद की सीट के आगे मल्टीमीडिया डिस्प्ले है। पीएम मोदी ने कहा कि नई संसद हर भारतीय को गौरवान्वित करती है। उल्लेखनीय है कि नई संसद के उदघाटन को लेकर करीब बीस विपक्षी दलो ने लामबंदी कर रखी है और कार्यक्रम का बायकाट करने का एलान किया है।
हालांकि इन्हें मनाने के प्रयास जारी हैं, विपक्ष का कहना है कि संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति के द्वारा कराय जाना चाहिये, क्योंकि वे संविधान प्रमुख हैं। हालाकि 88 सेवानिवृत्त नौकरशाह, 100 प्रतिष्ठित नागरिक और 82 अकादमी जगत के लोगो ने एक संयुक्त बयान जारी करके विपक्ष की आलोचना की है। इनमें एनआईए के पूर्व निदेशक वाईसी मोदी, पूर्व आईएएस अधिकारी आरडी कपूर, गोपाल कृष्ण और समीरेंद्र चटर्जी के अलावा लिंगया विश्वविद्यालय के कुलपति अनिल रॉय दुबे शामिल हैं।
हर राज्य की विशेषताएं भवन में समाहित
इस इमारत में देश के अलग-अलग हिस्सों की मूर्तियां और आर्ट वर्क बनाए गए हैं। देश में पूजे जाने वाले जानवरों की झलकियां भी हैं। इनमें गरुड़, गज, अश्व और मगर शामिल हैं। भवन में तीन द्वार हैं, जिन्हें ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार नाम दिया है। इस इमारत में एक भव्य संविधान हॉल, एक लाउंज, एक लाइब्रेरी, डाइनिंग हॉल और पार्किंग की जगह भी होगी। संसद में लगी सागौन की लकड़ी नागपुर से मंगाई तो राजस्थान के सरमथुरा का सैंडस्टोन यूपी के मिर्जापुर की कालीन संसद में लगा अशोक चक्र इंदौर से लाया गया है।
क्या जरूरत है वहां जाने की नयी संसद पर विवाद के बीच अब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कह डाला है कि नया संसद भवन नहीं बनना चाहिए था। सरकार पुराना इतिहास बदलना चाहती है। आज मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, 'शुरू में भी बात हो रहा था कि ये (संसद भवन) बन रहा है, तो भी हमको अच्छा नहीं लग रहा था। ये तो इतिहास है, आजादी हुई तो जिस चीज की जहां पर शुरूआत हो गई, उसे वहीं पर विकसित कर देना चाहिए अलग से बनाने का कोई मतलब नहीं है. क्या पुराना इतिहास ही बदल दीजिएगा।
नए संसद भवन में वास्तुदोष ?
नए संसद भवन को लेकर कई तरह के सियासी विवादों के बीच इस नए भवन के वास्तु पर भी कुछ नए तथ्य सामने आए हैं। यह बता रहे हैं कि मौजूदा सरकार के लिए नया संसद भवन कई तरह की परेशानियों व नकारात्मकता का बायस बनेगा। इस नए भवन के बारे में महर्षि शिक्षण संस्थानों के प्रमुख और परमपूज्य महर्षि महेश योगी के परम शिष्य ब्रह्मचारी गिरीश ने आशंका व्यक्त की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि संसद भवन का आकार त्रिभुजाकार है, जो कि उपवेद स्थापत्य वेद-वास्तु विद्या के अनुरूप नहीं है। इस भवन में स्थित लोकसभा का मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर- पश्चिम अर्थात् वायव्य कोण दिशा में है। लोक सभा अध्यक्ष इस भवन में उत्तर- पश्चिम की ओर मुख कर विराजेंगे जो कि वास्तु विद्या के अनुरूप नहीं होगा।
सांसद उत्तर-पूर्व, दक्षिण और उत्तर-पश्चिम की ओर मुख कर बैठेंगे, यह भी वास्तु के अनुरूप नहीं है साथ ही इस भवन में सदा ही वाद-विवाद, लड़ाई-झगड़े, अवांछित अशांति और नकारात्मकता भरी रहेगी। राज्यसभा कक्ष का प्रमुख प्रवेश द्वार दक्षिण-पश्चिम में है। राज्यसभा के अध्यक्ष महोदय दक्षिण-पश्चिम नैत्परिक्य कोण की ओर मुख कर बैठेंगे, यह भी वास्तु विद्या के अनुसार अशुभ है। ' राज्यसभा में सांसद भी विभिन्न दिशाओं में मुख कर बैठेंगे। जैसे कि उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम, उत्तर - पूर्व, दक्षिण-पूर्व की ओर मुख कर बैठेंगे, यह भी वास्तु विद्या के अनुसार अशुभ है। इसी तरह सेंट्रल लांज षटकोण है, सामान्यतः वास्तु अनुरूप भवनों की रचना वर्गाकार अथवा आयताकार होना चाहिए। कार्यालयों की दो कतारें भी वास्तु की दृष्टि से इस भवन में अशुभ मानी जायेंगी।
कांस्टीट्यूशन हॉल की रचना भी त्रिभुजाकार होने के कारण अशुभ प्रतीत होती है। अतः इस नवीन पार्लियामेंट भवन की वास्तु संरचना दोषपूर्ण है और भविष्य में मोदी सरकार एवं आगे आने वाली सभी सरकारों को निरन्तर अस्थिरता, नकारात्मकता, विरोध का सामना करना होगा एवं भारतवर्ष के लिये यह भवन राजनैतिक दृष्टि से हानिप्रद सिद्ध होगा। ब्रह्मचारी गिरीश का आकलन है कि "नये भवन के उद्घाटन समारोह को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों में मत-मतांतर, वाद- विवाद, राष्ट्रीय नेताओं द्वारा अनावश्यक कव्य व विवादास्पद कथन इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। ब्रह्मचारी ने आशा व्यक्त कि भविष्य में केन्द्र सरकारें और राज्य सरकार अपने नये भवनों के निर्माण में उच्च कोटि के वैदिक वास्तुविदों का मार्गदर्शन प्राप्त करके ही भवन निर्माण करेंगी।