राजस्थान के इतिहास में पहली बार मुख्यमंत्री का बजट भाषण तीस मिनट के लिए रोका गया। इसका कारण ये बताया जा रहा है, कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने जब बजट पढ़ना शुरु किया तो वे पिछले साल का बजट पढ़ने लगे।
दो पन्ने पढ़ने के बाद जब उन्हें टोका गया तब उन्हें पता लगा कि वे पिछले साल का बजट पढ़ रहे हैं। विपक्ष का आरोप मुख्यमंत्री गहलोत ने पुराना बजट पढ़ा। अब सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं।
बड़ा सवाल यह है कि सीएम के ब्रीफ़केस में पुराना बजट आया कैसे? अफ़सरों पर कार्रवाई होगी लेकिन इतनी भीषण गलती हुई कैसे? नए बजट की प्रति कहां है?
BJP ने इस पर सवाल उठाते हुए लिखा है, कांग्रेस सरकार की एक और 'ऐतिहासिक गलती'! जब 'सरकार' जनता-जनार्दन को दरकिनार कर सिर्फ एक परिवार की 'सेवा' में समर्पित हो जाएं तो ऐसा ही होता है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पिछले साल का बजट पढ़ते रहे...उन्हें टोका गया तो हंसने लगे।
@pantlp ने लिखा राजस्थान के इतिहास में पहली बार मुख्यमंत्री का बजट भाषण तीस मिनट के लिए रोका गया।विपक्ष का आरोप मुख्यमंत्री गहलोत ने पुराना बजट पढ़ा। अब बड़ा सवाल यह है कि सीएम के ब्रीफ़केस में पुराना बजट आया कैसे? अफ़सरों पर कार्रवाई होगी लेकिन इतनी भीषण गलती हुई कैसे? नए बजट की प्रति कहां है?
एक अन्य यूजर @Ajay_reporter ने सीएम गहलोत पर सवाल उठाते हुए तंज कसा है, जब सारा ध्यान कुर्सी बचाने पर हो, तब बजट की तरफ कौन ध्यान देता है? पढ़ना ही है, फिर चाहे नया हो या पुराना।
एक और यूजर ने लिखा है @KapilTripathiji बजट से पहले राजस्थान सरकार की हुई किरकिरी, अशोक गहलोत ने पुराना बजट पढ़ा - 8 मिनट तक पुराना भाषण पढ़ते रहे, विपक्ष ने कहा लापरवाह मुख्यमंत्री बिना पढ़े आ गए। - सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने सीएम के कान में आकर टोका। - राजस्थान में पहली बार बजट भाषण के दौरान कार्यवाही स्थगित।
वहीं यह भी कहा जा रहा है कि अधिकारियो के भरोसे जनता की चुनी हुई सरकारें नहीं चलती। बजट में गफलत/गलती की जिम्मेदारी सरकार के साथ साथ अधिकारियों की भी है। जिम्मेदारों पर कार्यवाही हो और संदेश दिया जाए कि अधिकारियों पर कार्यवाही की गई है।