आगामी कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर दिल्ली में AICC कार्यालय में कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक चल रही है. 

उम्मीद तो यह है कि इस बैठक के बाद प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कभी भी की जा सकती है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने के लिए कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक आयोजित की गई है.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में अब एक महीने से भी कम का समय बचा हुआ है. कर्नाटक में 10 मई को मतदान है और नतीजे 13 मई को घोषित होंगे. कर्नाटक में बीजेपी, कांग्रेस, जेडीएस, आप, बीएसपी, एआईएमआईएम जैसी पार्टियां 224 सीटों पर लड़ रही हैं. , 

फिलहाल, कर्नाटक में बीजेपी की सरकार है. बासवराज बोम्मई राज्य के मुख्यमंत्री हैं. हालांकि, साल 2018 में जब पिछला विधानसभा चुनाव हुआ था, तब बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भी सरकार नहीं बना पाई थी. कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई थी. बाद में 14 महीने के भीतर ही सरकार गिर गई और बीजेपी ने सरकार बना ली.

कांग्रेस सीईसी की पहली बैठक में क्या हुआ?

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बैठक 17 मार्च को दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में आयोजित की गई थी. 

इस बैठक में पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया था. बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की थी. 

इस बैठक में अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी मौजूद रहे थे. करीब तीन घंटे तक चली बैठक में कर्नाटक के 125 उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा हुई थी और सूची तैयार की गई. फिलहाल, बाकी सीटों के लिए नामों पर आज सहमति बनने की उम्मीद है.  

मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या कहा?

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि राज्य की शेष 100 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी आज चुनाव आयोग की बैठक कर रहीं हैं. इससे पहले पार्टी ने 124 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी.

पिछले विधानसभा चुनाव की स्थिति-

साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव की बात करें तो कर्नाटक में 224 विधानसभा सीटें हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी सरकार बनाने में नाकाम रही थी. बीजेपी ने 108 सीटें जीतीं, लेकिन यह बहुमत के आंकड़े से 9 कम थी. इसके बाद 80 सीटें जीतने वाली कांग्रेस और 37 सीटें जीतने वाली जनता दल सेक्युलर (JDS) ने मिलकर सरकार बनाई. लेकिन कुछ समय बाद कई विधायक बीजेपी में शामिल हो गए और सरकार बीजेपी की बन गई थी.