भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को "लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन करने" के लिए नियामक नियमों की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर, इसे "बेहूदा विचार" करार दिया है।
एक वकील ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी जिसमें देश में हर लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण के लिए दिशानिर्देशों का आग्रह किया गया था। उन्होंने साथ रहने वाले जोड़ों की सामाजिक सुरक्षा की भी मांग की। याचिकाकर्ता के मुताबिक, इससे लिव-इन रिलेशन से जुड़े अपराधों में कमी आ सकती है।
इस जनहित याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI ने कहा, “यह क्या है? लोग यहां कुछ भी लेकर आते हैं। हम ऐसे मामलों पर लागत लगाना शुरू करेंगे। किसके साथ पंजीकरण? केंद्र सरकार का लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों से क्या लेना-देना?”
“क्या आप इन लोगों की सुरक्षा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं या लोगों को लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रहने दे रहे हैं? कृपया। इन याचिकाओं पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से नाराज होकर कहा, "ये सब मूर्खतापूर्ण है, इसे बर्खास्त किया जाता है।"
याचिकाकर्ता चाहता था कि केंद्र लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य बनाए। यह याचिका श्रद्धा वाकर और निक्की यादव हत्याकांड के सामने आने के बाद दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की वकील ममता रानी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि लिव-इन पार्टनर की सुरक्षा के लिए पुलिस को उनके रिश्ते की जानकारी होनी चाहिए।