महिलाओं मासिक धर्म या माहवारी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है लेकिन इस दौरान हारमोनल चेंजेस के कारण महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं की इस समस्या और इस दौरान होने वाली परेशानियों के चलते देश में पहली बार किसी राज्य ने इस दिशा में सार्थक पहल की है। महिलाओं को इस दौरान पीरियड्स लीव देने की पहल सामने आई है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी विश्वविद्यालयों में महिला छात्राओं को पीरियड्स और मेटरनिटी लीव दी जाएगी। सीएम ने कहा कि केरल ने एक बार फिर देश के लिए एक मॉडल पेश किया है। सीएम विजयन ने कहा कि राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी संस्थानों में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
इस फैसले का ऐलान सीएम विजयन ने सोशल मीडिया के जरिए किया। उन्होंने कहा कि केरल सरकार का यह कदम देश में अपनी तरह का पहला कदम है। उनकी सरकार महिला समर्थक है। यह समाज में लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए वामपंथी सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है।
उन्होंने कहा कि हमारे उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी संस्थानों में अध्ययनरत छात्राओं को पीरियड्स (मासिक धर्म) एवं मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) प्रदान किया जायेगा। यह कदम लिंग-न्यायपूर्ण समाज को साकार करने के लिए एलडीएफ सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
सीएम ने कहा कि वैसे तो पीरियड्स एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, लेकिन इससे महिलाओं को काफी मानसिक तनाव और शारीरिक परेशानी होती है। इसीलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि छात्राओं को उपस्थिति अनिवार्य करने में 2% की छूट दी जाएगी।
विजयन ने कहा कि यह देश में पहली बार है कि किसी राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्राओं के लिए इस तरह का महिला हितैषी फैसला लिया है. इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग ने 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी छात्राओं को अधिकतम 60 दिन का मातृत्व अवकाश देने का निर्णय लिया है।