जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। मनोज सिन्हा ने दावा किया है कि महात्मा गांधी के पास कोई डिग्री नहीं थी। आईटीएम ग्वालियर में दिया गया उनका ये बयान अब वायरल हो रहा है।
उनके अजीबोगरीब दावे पर कांग्रेस नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। यूजर्स ने अब इस बात को लेकर सवाल उठाने शुरु कर दिए हैं। उन्होंने पूछा है कि अगर गांधी जी के पास डिग्री नहीं होती तो वे कोर्ट में केस कैसे लड़ते थे।
मनोज सिन्हा गुरुवार को एक कार्यक्रम में शामिल होने मध्य प्रदेश के ग्वालियर आए थे। उन्होंने आईटीएम ग्वालियर में आयोजित राममनोहर लोहिया व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए यह बयान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए गांधीजी का उदाहरण दिया। सिन्हा ने कहा कि डिग्री से ज्यादा जरूरी शिक्षा है। पढ़ाई डिग्री से ज्यादा जरूरी है।
अपने संबोधन में सिन्हा ने आगे कहा कि ज्यादातर लोगों की यह गलत धारणा है कि गांधी जी के पास कानून की डिग्री थी। सच तो यह है कि उनके पास कोई डिग्री नहीं थी। इसके बावजूद वे राष्ट्रपिता बने। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
'एमपी कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया सलाहकार पीयूष बाबेले ने मनोज सिन्हा के इस बयान की आलोचना की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि महात्मा गांधी डिग्री धारक बैरिस्टर थे। बाबेले ने आगे लिखा कि ये सारी कोशिशें उस वक्त से शुरू हुईं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्रियों पर सवाल उठने लगे। महात्मा गांधी ने कानून की डिग्री लंदन से ली। उन्होंने 1888 में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में प्रवेश किया। उनकी कानून की पढ़ाई 1891 में पूरी हुई थी।