सियासत में कुर्सी और सत्ता की ताकत हासिल करने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। यह बात उस समय सोशल मीडिया पर तैर गई जब पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने पुंछ जिले में नवग्रह मंदिर का दौरा किया और पूजा-अर्चना की।
महबूबा मुफ्ती द्वारा मंदिर में पूजा-अर्चना पर मुस्लिम संगठन भड़क भी गए। इत्तेहाद उलेमा-ए-हिन्द के मुफ़्ती असद कासमी ने कहा कि महबूबा ने जो किया वो गैर इस्लामिक है और महबूबा की पूजा इस्लाम के खिलाफ है।
वहीं जब फोटो आम हुआ तो सोशल मीडिया पर कामेंट्स भी भर भर कर आने लगे। कारण भी साफ़ था क्योंकि ये वही महबूबा मुफ़्ती हैं जिनके तेवर .. साफ्ट हिन्दुत्व मुद्दे को लेकर काफी तल्ख़ हुआ करते थे।
अब कहा जाने लगा कि सियासी जमीन को पुख्ता करने के लिए या फिर भाजपा की पिच पर ही भाजपा को मात देने के लिए महबूबा ने ये हथकंडा अपनाया है। एक यूजर ने फ़रमाया- अब असली धर्मनिरपेक्षता नज़र आने लगी है| तिरंगा उठाना तो छोड़िए ..शिव महिमा भी गाने लगे।
एक साहब ने लिखा कि जड़ों की और वापिसी है। एक जनाब लिखते हैं ..पालिटिकल ड्रामा है। एक और सोशल मीडिया यूजर कहतें हैं कि और कितने अच्छे दिन चाहिए। एक यूजर ने लिखा है, "महबूबा ने जो किया, वह सही नहीं है, उनका मंदिर में जाना इस्लाम की मान्यता के ख़िलाफ़ है।
खैर वजह जो भी रही हो..महबूबा मुफ़्ती चर्चा में तो आ ही गई और यह भी साफ़ हो गया कि ..सियासत में सिर्फ और सिर्फ ..सत्ता ही मायने रखती है ..चाहे वो किसी भी मूल्य या किसी भी स्तर पर जाकर हासिल हो।
हालाँकि मामले को तूल पकड़ता देख महबूबा ने सफाई भी दी और कहा- हम लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। पूंछ में मंदिर बना है,वे चाहते थे कि मैं मंदिर के अंदर जाकर देखूं। वहां किसी ने श्रद्धा से मेरे हाथ में पानी का लोटा दिया कि आप इस पर डालिए, तो मैंने डाल दिया अगर मैंने पानी डाल दिया तो यह मेरा मामला है इस पर बहस नहीं होनी चाहिए