राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया और कभी अच्छे दोस्त हुआ करते थे लेकिन अब एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंदी बन गए हैं। बदले हुए हालातों में भी राहुल गांधी और सिंधिया एक दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी से बचते ही नज़र आये थे मगर दोनों के बीच सियासी मतभेद अब मनभेद में बदलता नज़र आ रहा है। 

दरअसल हाल ही में राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ने वाले नेताओं के नाम का उल्लेख करते हुए लिखा था- सच्चाई छुपाते हैं, इसलिए रोज़ भटकाते हैं! सवाल वही है - अडानी की कंपनियों में ₹20,000 करोड़ बेनामी पैसे किसके हैं? 

राहुल गांधी के ट्वीट का जवाब देते हुए सिंधिया ने लिखा, स्पष्ट है कि अब आप एक ट्रोल तक सीमित हो चुके हैं। मुझ पर बेबुनियाद आरोप लगाने, और मुख्य मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के बजाय, इन तीन प्रश्नों का जवाब क्यों नहीं देते?

1  पिछड़े वर्ग को लेकर अपने अपमानजनक बयान के लिए माफ़ी क्यों नहीं मांगते? उल्टा कहते हैं कि आप सावरकर जी नहीं हैं, माफ़ी नहीं माँगेंगे! देश सेवक का अपमान और इतना अहंकार!! 

2. जिस न्यायालय पर कांग्रेस ने सदैव ऊँगली उठाई, आज अपने स्वार्थ हेतु उस पर दबाव क्यों बना रहे हैं ?

3. आपके लिए नियम अलग क्यों हों ? अपने आप को क्या आप फर्स्ट क्लास नागरिक मानते हैं? आप अहंकार में इस कदर ग्रस्त है कि शायद इन सवालों की महत्ता भी आपकी समझ से परे है।

सिंधिया के इस ट्वीट पर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा - ज्योतिरादित्य सिंधिया जी, पिता की उम्र से बड़े लोगों से पैर छुआ कर महाराज कहलवाने वाले आप जैसे बड़बोले अहंकारी अब शिष्टाचार पर ज्ञान दे रहे हैं?  लोग आपके परिवार के ऊपर ग़द्दारी का आरोप लगा कर भूल करते हैं, क्योंकि ग़द्दारों की सूची में तो सबसे बड़ा नाम आपका है। जब तक कांग्रेस सत्ता में रही यहाँ सत्ता की खूब मलाई खाई और फिर मौक़ा परस्त बन कर भाजपा में शामिल हो गए - क्यों? जिससे कि मंत्री बने रहें, सरकारी बंगला मिला रहे? 

सुप्रिया श्रीनेत ने आगे लिखा कि सत्ता का यह लालच ही आपकी असली पहचान है आपको आगे बढ़ाने का काम कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस की सरकार ने किया। पर काश आपके राजमहल में पिछड़े वर्ग की आवाज़ पहुँच पाती, जिन्होंने चोरों के साथ अपने समाज का नाम जोड़ने पर आपके अध्यक्ष नड्डा जी को लीगल नोटिस भेजा है। मंत्री बनने का क्या फ़ायदा जब अंत में बचाव इस देश के चोर और लुटेरों का ही करना है।

9 साल से सत्ता में भाजपा है - चोरों को किसने भगाया? अडानी पर आरोप गंभीर है, आपको लगता है कि आपके जैसों की टुच्चई से हम मुद्दे से भटक जाएँगे? जवाब तो देना ही पड़ेगा - 20,000 करोड़ किसके हैं? आप चाटुकारिता में इतने ग्रस्त हैं - कि अंधभक्त से भी चार हाथ आगे निकल गए। राहुल गांधी के ख़िलाफ़ बोलना आपकी मजबूरी है नहीं तो भाजपा स हाथ पकड़ कर बाहर फेंक दिये जाएँगे। आप एक एहसानफ़रामोश, सत्ता के लालच में स्वार्थी, अवसरवादी से ज़्यादा और कुछ नहीं। पर आज आपने एक नई पहचान बना ली - सस्ते ट्रोल की नई पहचान - मुबारक हो!

गौरतलब है, कि जिस दोस्ती को देश की राजनीति में मिसाल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था, वह आज देश की सबसे बड़ी राजनीतिक रंजिश की गाथा लिख रही है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राहुल गांधी के बीच चल रही सियासी जंग कहां खत्म होगी ये कोई नहीं जानता।