राजनीति में महाउठापटक का दौर शुरु होने वाला है। महाराष्ट्र में राकांपा को 'तोड़ने' के बाद अब बिहार में भी जदयू की सरकार पर भाजपा की नजर है। इधर आज मोदी सरकार के कैबिनेट बैठक बुलाई गई है, यह बैठक सियासी संकेतों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। सूत्रों का कहना है कि आज के बाद मोदी की कैबिनेट से लेकर भाजपा संगठन और राज्यों में भाजपा के संगठन व सत्ता के ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
भाजपा व सरकार यह सारी कवायद लोकसभा चुनाव के मद्देनजर तथा कांग्रेस समेत डेढ़ दर्जन विपक्षी दलों के चुनावी गठबंधन को देखते हुये की जा रही है। इसीलिए शरद पवार की पार्टी में कल भाजपा ने सेंध लगा दी है।
चिराग की एंट्री
जानकारों का मानना है कि बिहार में नीतीश सरकार को घेरने के लिये मोदी कैबिनेट में चिराग पासवान की आमद कराई जा सकती है। हाल ही में बीजेपी ने चिराग को कैटिगरी की सुरक्षा दी थी। बिहार में चिराग के साथ करीब 6 फीसदी दलित समुदाय का वोट है। इसके अलावा लोक जनता दल के मुखिया उपेंद्र कुशवाह की भी ऐंट्री हो सकती है। उनका ओबीसी वोट पर प्रभाव है तथा बिहार में नीतीश को चुनौती दे सकते हैं।
सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि कोई आश्चर्यजनक नहीं होगा कि यदि राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल भी मंत्री बन जायें। इसी तरह भाजपा इस वक्त शिरोमणि अकाली दल से संबंध बनाने की कोशिश में फिर जुटी है और संभव है कि हर सिमरत कौर बादल की भी एंट्री कैबिनेट में कराई जाए। इसी तरह चंद्रबाबू नायडू के टीडीपी से भी किसी सांसद को मंत्री बनाने के विकल्प खुले रखे गये हैं।
गौरतलब है कि किसान कानून के विरोध एसएडी ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया था। सर्वे के मुताबिक आप को 32.10% वोट मिल सकते हैं। वहीं, बीजेपी को 15.30% और एसएडी को 21.70% वोट मिलता दिख रहा है। यानी अगर दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ें तो ये वोट प्रतिशत 37% तक पहुंच जाएगा।
चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाला तेलुगु देशम पार्टी पहले भी एनडीए में शामिल रह चुकी है। नायडू एनडीए के संयोजक भी रह चुके हैं। बीजेपी दक्षिण में एकमात्र राज्य कर्नाटक को गंवाने के बाद एक-एक कदम फूंककर उठा रही है। आंध्र प्रदेश में पार्टी को अपना जनाधार बढ़ाने के लिए नायडू की जरूरत महसूस हो रही है।