धर्म-धम्म की अवधारणा, भारतीय चेतना का मूल स्वर रही है। हमारी परंपरा में कहा गया है, “धार्यते अनेन इति धर्म:” अर्थात जो सबको धारण करता है, यानी आधार देता है, वह धर्म है। धर्म की आधारशिला पर ही मानवता टिकी हुई है।
यह बात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को भोपाल में 7वें अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कही। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में इस मौके पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर भी मौजूद रहे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि स्वतंत्रता मिलने के बाद हमने जो लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई उस पर धर्म धम्म का गहरा प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। धर्म की आधारशिला पर पूरी मानवता टिकी हुई है। राग द्वेष से मुक्त होकर मैत्री, करुणा और अहिंसा की भावना से व्यक्ति और समाज का विकास करना, पूर्व के मानववाद का प्रमुख संदेश रहा है।
उन्होंने कहा कि मुझे यह देखकर गर्व होता है कि हमारे देश की परंपरा में धर्म को, समाज व्यवस्था और राजनीतिक कार्यकलापों में, प्राचीन काल से ही केंद्रीय स्थान प्राप्त है। नए युग में मानववाद के सिद्धांत पर केंद्रित सम्मेलन 3 से 5 मार्च तक होगा।
धर्म-धम्म के वैश्विक विचारों को एक मंच प्रदान करने वाले इस सम्मेलन में 15 देशों से 350 से अधिक विद्वान शामिल हो रहे हैं। इसमें भूटान, मंगोलिया, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाइलैंड, वियतनाम, नेपाल, दक्षिण कोरिया, मॉरिशस, रूस, स्पेन, फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन की सहभागिता रहेगी।
तीन दिवसीय सम्मेलन में 4 मुख्य सत्रों में 25 विद्वान अपने विषय का निरूपण करेंगे। इसी दौरान 15 समानान्तर-सत्र भी होंगे, जिसमें सम्मेलन की थीम "नए युग में मानववाद का सिद्धांत" पर केंद्रित 115 शोध-पत्र पढ़े जाएंगे।
पहले दिन उद्घाटन-सत्र के अतिरिक्त एक अनूठा मंत्री सत्र भी होगा, जिसमें 5 देशों के मंत्री सांस्कृतिक सामंजस्य और विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। इस सत्र में भूटान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल और भारत के मंत्री शामिल होंगे। कीनोट-सत्र में राम जन्म-भूमि न्यास के सचिव स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज, श्रीलंका के प्रो. कोटापितिये राहुल अनुष्का थेरो और स्वामीनारायण शोध संस्थान अक्षरधाम के महोमुखोपाध्याय साधु भद्रेश दास अपने विचार व्यक्त करेंगे। मुख्य-सत्र में अमेरिका से प्रो. डेविड फ्रॉले, ब्रिटेन के डॉ. इयान बेकर, दक्षिण कोरिया के प्रो. जियो ल्योंग ली, थाइलैंड से डॉ. सुपची वीरपुचांग, चिन्मय मिशन के स्वामी मित्रानंद और पंजाब केंद्रीय विवि के चासंलर प्रो. जगबीर सिंह मौजूद रहेंगे।