प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार को लोकसभा चुनाव में उखाड़ फेंकने का एलान करने के लिए 23 जून को पटना में विपक्षी एकता की बैठक के बाद अब बंगलुरू की बैठक में सोनिया गांधी की ऐंट्री होने वाली है। इससे विपक्षी ऐकता का नेता चुनने की कवायद में नया पेंच भी आ सकता है। पटना बैठक में देशभर से 15 दल जुटे थे।

अब बेंगलुरू में दो दर्जन दलों का इससे भी बड़ा जुटान हो रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इससे कितने खुश हो रहे होंगे, यह उनका मन ही जानता होगा क्योंकि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की संयोजक और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी भी इस बैठक में शामिल होंगी। भाजपा के खिलाफ चल रहे इस मौजूदा गठबंधन की सर्वेसर्वा सोनिया ही हैं। बताया जाता ह कि पहले तो पटना आने में राहुल गांधी भी हिचकिचा रहे थे, लेकिन बेंगलुरू में सोनिया रहेंगी तो क्या होगा, यह जदयू को अंदाजा है।

तीन वजहों से मजबूत हैं सोनिया

लिहाजा विपक्षी एकता के लिए संयोजक के तौर पर स्वाभाविक तौर पर सोनिया की देवेदारी उभरेगी। क्योंकि सोनिया मौजूदा ऐसे ही गठबंधन की अध्यक्ष हैं, दूसरा यह कि राष्ट्रीय दल के प्रतिनिधि के रूप में उनके पास और कोई पद नहीं है और तीसरा यह कि कांग्रेस के बगैर विपक्षी एकताके गठबंधन का अस्तित्व नहीं हो सकता है।