भोपाल: राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूईंग बिजनेस यानि सहज व्यवसाय के तहत नई सुविधा प्रदान की है। अब स्टाम्प बेचने का लायसेंस पांच साल के लिये दिया जायेगा तथा ई-स्टाम्प बेचने का लायसेंस निजी कंपनियां भी ले सकेंगी। इसके लिये राज्य सरकार ने भारतीय स्टाम्प नियम में बदलाव कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पहले स्टाम्प विक्रेता को एक लायसेंस एक साल के लिये तथा ई-स्टाम्प बेचने वाले सेवा प्रदाता का लायसेंस दो वर्ष के लिये मिलता था। परन्तु अब इन दोनों वर्ग में लायसेंस पांच साल के लिये मिलेगा। लायसेंस फीस भी एक हजार रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये कर दी गई है।

इसी प्रकार, पहले स्टाम्प विक्रय का लायसेंस दो वर्ग में दिया जाता था जिसमें पहला वर्ग स्टाम्प विक्रेता का था और दूसरा वर्ग सेवा प्रदाता का था और सेवा प्रदाता में भी दो वर्ग थे यथा एक वैयक्तिक और दूसरा बैंक-वित्तीय संस्थायें या डाकघर। लेकिन अब सेवा प्रदाता वर्ग में उक्त दोनों के अलावा केंद्र या राज्य सरकार की कम से कम 51 प्रतिशत अंशपूंजी वाले निगम-मंडल तथा कंपनी अधिनियम के तहत रजिस्ट्रीकृत कोई कंपनी को भी शामिल कर लिया गया है।

इसी प्रकार, अब यह भी प्रावधान किया गया है कि बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं, डाकघर, निगम-मंडल एवं कंपनियों को ई-स्टाम्प विक्रय करने पर कोई कमीशन या बट्टा राज्य सरकार द्वारा नहीं दिया जायेगा। साथ ही ई-स्टाम्प विक्रय के लिये ऑनलाईन आवेदन दिये जाने पर यदि पन्द्रह दिन के अंदर लायसेंस नहीं दिया जाता है तो वह लायसेंस दिया जाना माना जायेगा।

शर्तों के उल्लंघन पर लायसेंस के निलम्बन या रद्दीकरण की कार्यवाही तीन सप्ताह में करना जरुरी होगा। लायसेंस का निलम्बन भी तीन माह तक के लिये ही किया जा सकेगा। लायसेंस के निलम्बन या रद्दीकरण का अधिकार उप महानिरीक्षक पंजीयन को होगा तथा उसके ऐसे आदेश के विरुध्द आईजी पंजीयन को साठ दिन के अंदर अपील करना होगी।