भोपाल: राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से सडक़ पर रहने वाले बच्चों के पुनर्वास हेतु नई नीति जारी कर दी।
नीति में कहा गया है कि सामाजिक परिस्थितियों, आर्थिक अभाव एवं संसाधनों की कमी के कारण अनेक परिवार में ऐसी विषम परिस्थियिां निर्मित हो जाती हैं कि उन परिवार के बच्चे सामान्यत: भिक्षावृत्ति करने, कचरा/पन्नी बीनने, बालश्रम करने, तमाशा दिखाते हुये पाये जाते हैं और माता-पिता के बेरोजगार होने, उचित संरक्षण तथा पुनर्वास नहीं होने, गरीबी और विपरीत पारिवारिक परिस्थिति एवं उचित मार्गदर्शन नहीं मिलने के कारण ऐसे बच्चे सडक़ पर रहने को मजबूर होते हैं।
बच्चों की सरल प्रकृति होने के कारण उनके मादक पदार्थों की तस्करी अथवा अपराध में उपयोग किये जाने, यौन शोषण, बाल मजदूरी, बाल तस्करी, नशे के शिकार होने की संभावना बनी रहती है।
नई नीति के तहत, अब इन बच्चों का चिन्हांकन किया जायेगा तथा रेस्कयु, परामर्श एवं अभिलेखीकरण होगा। बाल स्वराज पोर्टल पर एन्ट्री कर डेटा बेस बनाया जायेगा एवं इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जायेगा। समिति बच्चों को परमर्श देगा तथा स्कूल जाने के लिये प्रेरित करेगी तथा उन्हें बाल देखरेख संस्था या नशमुक्ति केंद्रों में रखेगी।
परित्यक्त, निराश्रित, बेसहारा बच्चों को दत्तक में भी दिया जा सकेगा। शासकीय एवं निजी प्रायोजन से इन्हें आर्थिग्क सहायता भी उपलब्ध कराई जायेगी। दिव्यांग बच्चों को पेंशन का लाभ दिया जायेगा। 18 वर्ष से अधिक बच्चों को रोजगार या स्वरोजगार में लगाया जायेगा।