माता वैष्णो देवी का मंदिर हिंदुओं के लिए एक पवित्र स्थान है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर ऊंचाई पर स्थित होने के कारण वृद्धों या अशक्तों को बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। उनके लिए सफर या तो महंगा होता है या फिर मुश्किल।
काफी समय से यहां रोपवे बनाने की मांग की जा रही थी। अब सरकार ने 250 करोड़ की लागत से रोपवे बनाने की परियोजना शुरू की है। साल 2022 में करीब 91 लाख श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचे। इनमें से अधिकतर लोग त्रिकुटा पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर लंबी चढ़ाई करने के बाद यहां पहुंचते हैं।
जो भक्त पैदल घर नहीं पहुंच सकते वे पिट्ठू या खच्चरों का सहारा लेते हैं। ये महंगा भी होता है, इसलिए हर कोई इसका इस्तेमाल नहीं कर पाता। 12 किमी की दूरी पैदल तय करने और फिर वापस आने में 1 दिन का समय लगता है। अब रोप-वे इस प्रक्रिया को घटाकर कुछ मिनट कर देगा। रोपवे 2.4 किमी लंबा होगा और इसके लिए राइट्स यानी रेलवे इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विसेज ने बोलियां आमंत्रित की हैं।
जब यह रोप-वे तैयार हो जाएगा तो इसे माता दरबार तक पहुंचने में महज 6 मिनट का समय लगेगा। अभी इसमें 5-6 घंटे लगते हैं। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में 3 साल लगेंगे। रोपवे कटरा के ताराकोट आधार शिविर से मंदिर के पास सांझी छत तक जाएगा। रोप-वे गंडोला केबल कार सिस्टम से लैस होगा। इसे एरियल रोप-वे भी कहते हैं। इसमें तारों पर एक केबिन पहाड़ों के बीच एक जगह से दूसरी जगह जाता है। गंडोला केबल कार में तारों की दोहरी व्यवस्था होती है।
रोपवे बनने के बाद श्रद्धालुओं के समय की बचत होगी, लेकिन यह विकल्प खच्चर या हेलीकॉप्टर से काफी सस्ता होगा। साल 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर तक पहुंचने के लिए एक नई सड़क का उद्घाटन किया था। इसके अलावा साल 2020 में दिल्ली से कटरा के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस भी शुरू की गई थी।