भोपाल: जंगल महकमे में 1994 बैच के आईएफएस अधिकारी विश्वनाथ होतगी का सर्विस ट्रैक रिकार्ड बड़ा ही गजब का है. जब भी उनका तबादला भिंड से हुआ, वह नई जगह ज्वाइन नहीं करते. मजबूरन विभाग को उनके तबादले को निरस्त करना पड़ा है. अगस्त 2021 में एक बार फिर होतगी का तबादला भिंड से प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय भोपाल कर दिया गया था. तब से लेकर आज तक 228 दिन बीत चुके हैं परंतु होतगी ने मुख्यालय में जॉइनिंग नहीं दी. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन-एक) ने मुख्यालय में जॉइनिंग देने के लिए तीन नोटिस जारी कर चुके हैं पर होतगी हैं कि भोपाल आने को तैयार ही नहीं है.
1994 बैच के आईएफएस विश्वनाथ होतगी के बैचमेट अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोट हो चुके हैं किंतु वे अभी तक डीएफओ ही हैं. इसके पहले भी 1110 दिन लापता रहे. तब भी जून 19 में उनका तबादला भिंड से भोपाल कर दिया था किंतु मुख्यालय में सीनियर अफसरों से दुर्व्यवहार और चार इमली रेस्ट हाउस में कर्मचारियों के साथ मारपीट के चलते उनका तबादला स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट जबलपुर कर दिया था.
यहां भी उन्हें बार-बार नोटिस दिया गया. राज्य शासन ने जब कर्नाटक के अखबार में उनके लापता होने का विज्ञापन प्रकाशित करने की प्रक्रिया शुरू की तब मई में जाकर उन्होंने जॉइनिंग दी. एसएफआरआई जबलपुर में जॉइनिंग देने के कुछ महीनों बाद होतगी के कहने कहने पर राज्य शासन ने उन्हें फिर भिंड पदस्थ कर दिया. भिंड वन मंडल से उनके खिलाफ लगातार शिकायत आने के बाद विभाग ने उन्हें अगस्त 21 में भिंड से भोपाल स्थानांतरित कर दिया. तब से वे लापता है.
केंद्र ने किया था अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव ख़ारिज-
1994 बैच के आईएफएस नंबर 2025 में सेवानिवृत्त होंगे. इनका सर्विस ट्रेक रिकॉर्ड अत्यंत खराब होने की वजह से स्टेट सर्विस रिव्यू कमेटी ने नवंबर 16 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरणमंत्रालय को भेजा था. उनके प्रस्ताव के साथ ही आईएफएस दिवंगत देवेश कोहली का भी प्रस्ताव था. केंद्र सरकार ने स्वर्गीय देवेश कोहली के प्रस्ताव पर अगस्त 2018 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश जारी कर दिए थे. केंद्र के आदेश के कुछ दिनों बाद ही कोहली कोहली का निधन हो गया. जबकि होतगी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने संबंधित स्टेट सर्विस रिव्यू कमेटी के प्रस्ताव को केंद्र ने खारिज कर दिया था.