भोपाल के करीब एक दर्जन पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं, यहां पेट्रोल डीजल खत्म हो गया है. लंबे समय बाद केंद्र सरकार की ओर से ग्राहकों को कुछ राहत प्रदान की गई, लेकिन पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल डीजल की किल्लत लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। यह परेशानी मुख्य रूप से प्रदेश के इंटिरियर एरिया में ज्यादा देखने को मिल रही है। इस स्थिति के चलते राजधानी सहित प्रदेश के कई पेट्रोल पंप बंद होने के कगार पर आ गए हैं।
पेट्रोल पंपों की इस स्थिति के चलते संचालकों सहित ग्राहकों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ रहा है। दरअसल, बीते कई दिनों से तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति घटा दी है। राजधानी के पेट्रोल पंपों पर तेल कंपनियां पेट्रोल व डीजल की आपूर्ति 50 प्रतिशत ही कर पा रही हैं। इस बारे में मप्र पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि इससे सबसे अधिक परेशानी भारत व हिंदुस्तान पेट्रोल पंप के संचालकों को हो रही है. ऐसे में सोमवार को प्रदेश के करीब 800 पेट्रोल पंप बंद होने के कगार पर पहुंच गए है।
भोपाल शहर के 12 पेट्रोल पंपों की स्थिति काफी खराब है जिसके चलते वे कभी भी बंद हो सकते हैं। यहां आपको बता दें कि भोपाल में पेट्रोल पंपों की कुल संख्या 152 है। इसके चलते कोकता ट्रांसपोर्ट नगर, नीलबड़,बैरसिया सहित शहर की सीमाओं व ग्रामीण क्षेत्र के पंपों पर पेट्रोल व डीजल न के बराबर बचा है। इससे पेट्रोल डीजल के लिए लोगों को एक से दूसरे पेट्रोल पंपों पर भटकना पड़ रहा है।
इंदौर शहर के पंप संचालकों का कहना है कि शहर के आसपास भी इसका असर शुरू हो गया है। कंपनियों की रणनीति से इंडियन ऑयल पर भी दबाव बढ़ने लगा है। यदि ऐसी स्थिति कुछ दिन रही तो डीजल-पेट्रोल की किल्लत से अन्य समस्या सामने आ सकती हैं। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन मप्र के अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार शहरों से ज्यादा ये परेशानी इंटीरियर क्षेत्रों में अधिक है. एक तो वहां आवाज उठाने वाले कम ही लोग होते हैं. इस समय सोयाबीन व धान की खेती के चलते उन्हें डीजल आदि की अधिक जरूरत पड़ रही है। ऐसे में पेट्रोल पंपों में डीजल न होना उनके लिए एक बड़ी समस्या का कारण बन रहा है।
बताया जा रहा है कि तेल कंपनियां घाटा बता कर पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति कम करती रहीं, तो आगामी दिनों में शहर के पंपों पर पेट्रोल-डीजल खत्म हो जाएगा। अभी तेल कंपनियां दो दिन में एक बार पेट्रोल व डीजल पंपों तक पहुंचा पा रही हैं। ऐसे में आज शाम तक पूरी स्थिति साफ हो पाएगी. यदि पेट्रोल नहीं आया तो सूखे पंपों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है।
इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में लगे पंपों तक पेट्रोल व डीजल की आपूर्ति नहीं करने पर स्थिति और अधिक खराब होना निश्चित है। यदि डीजल नहीं पहुंचा तो ग्रामीण क्षेत्रों में सोयाबीन व धान बुरी तरह से प्रभावित होगा। इधर तेल कंपनियों की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि डीजल में 23 रुपये और पेट्रोल में 16 रुपये प्रतिलीटर घाटा हो रहा है. इसलिए खपत के अनुसार पेट्रोल व डीजल नहीं दे पा रहे हैं। स्थिति बिगड़ते देख पेट्रोल-डीजल डीलर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार को आगाह कर दिया है। बताया जा रहा है कि सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियों ने तो फिलहाल आपूर्ति प्रबंधन शुरू किया है।