दोषी कोर्ट से मांग रहे जमानत, बहस पूरी, आदेश सुरक्षित
इंदौर: विख्यात गृहस्थ संत भय्यू महाराज आत्महत्या मामले में दोषियों की जमानत पर बहस हुई। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। संत भय्यू महाराज ने 12 जून 2018 को खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद पुलिस ने भय्यू महाराज को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उन्हीं के तीन सेवादार पलक, विनायक और शरद को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस की जांच के मुताबिक भय्यू महाराज से शादी की ख्वाहिश में पलक ने उनका अश्लील वीडियो बनाया और ब्लैकमेल करने लगी। बाद में उन्हें हाई डोज दवा देने लगी जिससे वे प्राय: बेहोश से रहने लगे थे। तीनों दोषी अब जेल में जिंदगी बिता रहे हैं और कोर्ट से जमानत की मांग कर रहे हैं।
जिला न्यायालय ने तीन साल में 32 गवाह और 150 पेशी के बाद 27 जनवरी 2022 को तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए छह-छह साल की सजा सुनाई थी। गौरतलब है कि आरोपियों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इधर भय्यू महाराज की दूसरी पत्नी आयुषी ने भी दोषियों की सजा बढ़ाए जाने की मांग करते हुए याचिका दायर की है।
पत्नी आयुषी को भी भय्यू महाराज से मिलने नहीं देता था विनायक
भय्यू महाराज सुसाइड केस में पहले उनकी बेटी कुहू और पत्नी आयुषी के बीच झगड़े की बातें भी सामने आई थीं, लेकिन पुलिस ने जब गहराई से जांच की तो ये कहानी कुछ और ही निकली। भय्यू महाराज की पत्नी और उनकी दोनों बहनों ने पुलिस को बताया कि विनायक आयुषी को भी भय्यू महाराज से मिलने तक नहीं देता था। जब परिवार के लोगों ने पलक पर यहां से नौकरी छोड़ने का दबाव बना दिया तो उसने नौकरी छोड़ तो दी, लेकिन घर की तिजोरी की चाबियां वह अपने साथ ही लेकर चली गई थी। पुलिस की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि महाराज के कुछ अन्य महिलाओं से संबंध थे जिनमें 2 आईएएस अफसर भी शामिल थीं।