भोपाल: प्रदेश के सीधी जिले में स्थित सोन घडिय़ाल अभयारण्य का कुछ हिस्सा रेत निकालने के लिये डिनोटिफाई किये जाने की तैयारी प्रारंभ हुई है। ऐसा आजीविका हेतु स्थानीय निवासियों को सोन नदी से रेत की आपूर्ति के लिये किया जा रहा है।
राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य एवं रिटायर्ड चीफ वाईल्ड लाईफ वार्डन डॉ. एचएस पाबला के तर्क पर यह कार्यवाही हो रही है।
डॉ. पाबला ने तर्क दिया था कि सोन घडिय़ाल अभयारण्य के ऐसे क्षेत्र जहां जलीय जीवों, मगरमच्छ, घडिय़ाल, कछुओं का रहवास नहीं है, को इस अभयारण्य से बाहर किये जाने हेतु पूर्व में गठित समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन का अवलोकन कर रेत उत्खनन हेतु स्थलों को चिन्हित कर डिनोटिफाई किया जा सकता है।
इस तर्क को मुख्यसमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों के अलावा राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्यों, वन्यप्राणी/जलीया जीव विशेषज्ञों की समिति का गठन कर प्रतिवेदन देने के लिये कहा है। बोर्ड की आगामी बैठकों में यह मामला फिर से प्रस्तुत किया जायेगा जिस पर सोन घडिय़ाल अभयारण्य का कुछ हिस्सा रेत उत्खनन के लिये डिनोटिफाई किये जाने पर निर्णय लिया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि सीधी जिले में सोन घडिय़ाल अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1981 में की गई है। यह कुल 209 वर्ग किमी में फैला हुआ है, जिसमें 161 किमी लंबी सोन नदी, 23 किमी बनास और 26 किमी गोपद नदी क्षेत्र शामिल है। अभयारण्य में नदी की पूरी लंबाई के दोनों तरफ 200 मीटर चौड़ी पट्टी भी शामिल है। यहां पाये जाने वाले मुख्य जलीय जीवों में घडिय़ाल, मगरमच्छ और कछुआ शामिल हैं।