Rahul Gandhi Modi Surname Case: गुजरात हाईकोर्ट ने 'मोदी सरनेम' पर टिप्पणी के खिलाफ मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत नहीं दी है. कोर्ट ने राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सत्र न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा. राहुल गांधी की टिप्पणी पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब बीजेपी प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिये कांग्रेस पर तंज कस रही हैं.

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रविशंकर प्रसाद बोले- राहुल गांधी आदतन अपराधी हैं?

बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले, जहां तक मानहानि का सवाल है तो राहुल गांधी आदतन अपराधी हैं. यह बात हम बहुत जिम्मेदारी के साथ कहना चाहते हैं. अगर आप उनकी राजनीतिक टिप्पणियों को देखें तो वे विदेश जाकर भारत के लोकतंत्र की मानहानि करते हैं, भारत की संस्थाओं की मानहानि करते हैं और अब तो मीडिया की भी मानहानि करते हैं. 

उन्होंने आगे कहा, अब तो वे पत्रकारों को भी नहीं छोड़ते हैं. वे जेएनयू जाते हैं और टुकड़े टुकड़े गैंग के साथ खड़े हो जाते हैं. सेना को लेकर खून की दलाली की बात करते हैं. इन्होंने राफेल को लेकर चौकीदार चोर अभियान चलाया और बाद में जनता ने जवाब दिया. इसके बाद उन्होंने माफी मांगी. उनके खिलाफ 7-8 मानहानि के केस चल रहे हैं.

उन्हें ठीकठाक बोलने की ट्रेनिंग क्यों नहीं दे सकते- रविशंकर प्रसाद 

रविशंकर प्रसाद ने बताया, राहुल गांधी ने 2019 के चुनाव में एक टिप्पणी की थी कि सारे चोरों के सरनेम मोदी क्यों होते हैं? देशभर में मोदी सरनेम अधिकांश पिछड़ों और अति पिछड़ों का होता है और ये घोर रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी थी. लोअर कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा दी, जिसके खिलाफ वह सेशन कोर्ट गए. सेशन कोर्ट ने उन्हें बेल तो दे दी लेकिन Conviction को स्टे नहीं किया. इसके खिलाफ वह गुजरात हाई कोर्ट गए और उनकी कोशिश यही थी कि उनका Conviction स्टे किया जाए और आज गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी इस प्रेयर को रिजेक्ट कर दिया है.

उन्होंने कहा, गुजरात हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की 2019 की मोदी उपनाम टिप्पणी पर मानहानि मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने के अनुरोध को खारिज कर दिया है. कोर्ट का कहना है कि यह सजा उचित और कानूनी है. उन्होंने कहा, गुजरात हाई कोर्ट का आज का निर्णय स्वागत योग्य है. अभी प्रायोजित टिप्पणियां कांग्रेस की ओर से आ सकती हैं कि इतना हॉर्स पनिशमेंट कोर्ट ने क्यों दिया? तो हमारा जवाब है कि इतना हाई ऑफेंस राहुल गांधी ने क्यों किया?

कांग्रेस पर तंज कसते हुए रविशंकर प्रसाद बोले, मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि वह राहुल गांधी को नियंत्रित क्यों नहीं कर सकती? उनको ठीकठाक बोलने की ट्रेनिंग क्यों नहीं दे सकते. जब सूरत की निचली अदालत ने माफी मांगने का मौका दिया, तो राहुल गांधी ने यह टिप्पणी करना बेहतर समझा, 'मैं सावरकर नहीं हूं कि माफी मांगूंगा'. इससे सचमुच पता चलता है कि राहुल के मन में देश के एक महान देशभक्त के प्रति कितनी नफरत है.

क्या है पूरा मामला-

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले 13 अप्रैल को राहुल गांधी ने 'मोदी सरनेम' पर एक टिप्पणी की थी. इस पर गुजरात में बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी की तरफ से दायर 2019 मामले में सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 499-500 (आपराधिक मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी.

इसके बाद 24 मार्च को राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द हो गई. 25 मार्च को राहुल गांधी ने माफी मांगने से इनकार कर दिया. जिसके बाद 27 मार्च को सरकारी बंगला छोड़ने का नोटिस मिल गया. फिर 22 अप्रैल को राहुल गांधी ने बंगला खाली कर दिया.

जिसके बाद राहुल गांधी ने सूरत सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, मगर वहां से भी राहत नहीं मिली. अब हाईकोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की गई है.