तीन पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती चल रही है. त्रिपुरा-नागालैंड में बीजेपी गठबंधन की सरकार बनना तय है क्योंकि उन्हें दोनों ही राज्यों में बहुमत हासिल हो चुका है. तो वहीं मेघालय में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है.

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अभी तक के रुझानों के मुताबिक, त्रिपुरा में 32 और नगालैंड में बीजेपी गठबंधन को बढ़त हासिल है, जबकि मेघालय में त्रिशंकु विधानसभा के आसार दिख रहे हैं.

त्रिपुरा में बीजेपी गठबंधन की जीत-

त्रिपुरा में सत्ताधारी बीजेपी+IPFT गठबंधन बहुमत पाता दिखाई दे रहा है. अभी तक के रुझानों में BJP गठबंधन 32 सीटों पर आगे चल रहा है. लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन को 16 सीटों पर बढ़त हासिल है. वहीं, नई नवेली टिपरा मोथा (TMP) ने सभी को चौंकाया है क्योंकि TMP 11 सीटों पर आगे हैं.

मेघालय में NPP आगे-

मेघालय विधानसभा की 59 सीटों पर मतदान हुआ था. बता दें कि राज्य में 60 सीटें हैं लेकिन एक प्रत्याशी के निधन के चलते वहां पर चुनाव नहीं कराया गया. रुझानों के मुताबिक, राज्य में एनपीपी 25 सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़ी पार्टी बनती नजर आ रही है. बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़ा है और उसे 5 सीटों पर बढ़त हासिल है. ममता बनर्जी की TMC मेघालय में 5 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि अन्य के खाते में 24 सीट जाती दिखाई दे रही है.

नागालैंड में बीजेपी गठबंधन को बहुमत-

नागालैंड में बीजेपी और एनडीपीपी गठबंधन प्रचंड बहुमत के साथ वापसी करता दिख रहा है. रुझानों में बीजेपी गठबंधन 60 में से 40 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं. मुख्य विपक्षी दल नगा पीपल्स फ्रंट (NPF) सिर्फ तीन सीटों पर आगे चल रहा है. कांग्रेस को एक भी सीट मिलती नहीं दिख रही है जबकि अन्य 17 सीटों पर आगे हैं.

तीन राज्यों में बढ़ा बीजेपी का वोट शेयर-

इससे पहले भी बीजेपी एनपीपी सरकार का हिस्सा थी. इस तरह तीनों राज्यों की सत्ता में बीजेपी की हिस्सेदारी हो जाएगी. वोट शेयर के मामले में भी बीजेपी की अच्छी स्थिति दिख रही है. पूर्वोत्तर के राज्यों में कभी बेहद कमजोर मानी जाने वाली बीजेपी को त्रिपुरा में 39 फीसदी वोट मिले. 

इसके अलावा नागालैंड में भी 18 फीसदी लोगों ने इसे चुना है. मेघालय में बीजेपी को 8 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं. मेघालय में भी टीएमसी को 5 सीटें मिल सकती हैं. हालांकि वह सत्ता से दूर रहेंगे. इसी बीच खबर आई कि एनपीपी के कोनराड संगमा और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के बीच बैठक हुई है. 

ऐसे में दोनों मिलकर सरकार बना सकते हैं. बीजेपी के लिए सबसे अहम त्रिपुरा की जीत होगी. 2018 में सत्ता में आई बीजेपी को पहले यहां छिटपुट सफलता ही मिली थी, लेकिन पहली बार 5 साल पहले सत्ता में आई थी. ऐसे में उनके लिए यहां खुद को दोहराना अहम होगा.

बंगाली और आदिवासी समुदायों से आबाद त्रिपुरा में बीजेपी की जीत का मतलब देशव्यापी जीत होगी. खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है. एक करोड़ से ज्यादा आदिवासी आबादी वाले मध्य प्रदेश में इस साल चुनाव होने हैं. यहां वह त्रिपुरा की जीत का हवाला देकर आदिवासी वोट बैंक का दावा कर सकते हैं.

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