भोपाल: 'मिशन-2023' के पहले ही कांग्रेस में बिखराव की शुरुआत हो गई है. इसकी शुरुआत भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के सबसे नजदीकी मीडिया इंचार्ज नरेंद्र सलूजा से हुई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को भेजे अपने इस्तीफे में व्यंग्य करते हुए सलूजा ने लिखा है कि 30 वर्षों के निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करने का अच्छा इनाम उपाध्यक्षओं की सूची में सबसे नीचे क्रम में स्थान रखकर दिया गया.
सलूजा कांग्रेस मीडिया विभाग के सबसे ताकतवर और सक्रिय प्रवक्ता रहे. विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस के इकलौते ऐसे प्रवक्ता थे, जो बीजेपी के मीडिया सेल पर भारी पड़ते थे. कांग्रेस सत्ता में आई तब भी प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में बैठकर कमलनाथ सरकार पर हो रहे विपक्षी हमलों का मुंहतोड़ जवाब देते रहे. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूपेंद्र गुप्ता से लेकर अमित शर्मा तक को सत्ता की रेवड़िया बंटी किंतु सरगुजा के नसीब में वह भी नहीं आई.
इसकी भी उन्होंने कभी शिकायत दर्ज नहीं कराई और ना ही अपनी पीड़ा से मीडिया को अवगत कराया. सत्ता से हटने के बाद उम्मीद थी कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ उन्हें मेहनत का सिला मीडिया विभाग के इंचार्ज बनाकर देंगे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने जीतू पटवारी को उनके ऊपर लाकर बिठा दिया. तब भी सलूजा अपना काम करते रहे. उदयपुर चिंतन के बाद कमलनाथ ने पिछले दिनों केके मिश्रा को मीडिया विभाग का अध्यक्ष बना दिया और उसके साथ ही उपाध्यक्षओं की घोषणा भी कर दी गई.
उपाध्यक्षओं की सूची में सबसे पहला नाम के के मिश्रा की पसंद की संगीता शर्मा को उपाध्यक्ष बनाकर बनाया गया. नरेंद्र सलूजा की इस सूची में पांचवा स्थान दिया गया. उनकी वरिष्ठता की अनदेखी करने का उन्हें मलाल हुआ और सूची जारी होने के साथ ही उन्होंने पीसीसी से बाय-बाय कर लिया. बातचीत के दौरान सलूजा ने यह स्वीकार किया कि उनकी घोर उपेक्षा हुई है. उनकी वरिष्ठता का ध्यान नहीं रखा गया इसलिए अब कांग्रेस के मीडिया विभाग और अन्य पद से इस्तीफा दे दिया.