समाजवाद के पैरोकार और वरिष्ठ नेता शरद यादव का गुरुवार रात निधन हो गया। मध्यप्रदेश के जबलपुर से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में मुकाम हासिल करने वाले शरद यादव के निधन पर श्रद्धांजलि का दौर जारी है। 

जेडीयू के पूर्व राष्टीय अध्यक्ष और वर्तमान में राजद के नेता शरद यादव के निधन पर सोशल मीडिया में संवेदनाओं का दौर जारी है। वरिष्ठ पत्रकार शकील अख्तर ने शरद यादव को याद करते हुए नीतीश कुमार से मिले अपमान का भी जिक्र किया है। 


 
उन्होंने लिखा कि-एक समय लोकसभा में शरद यादव, लालू यादव और मुलायम सिंह यादव की तिकड़ी बहुत ताकतवर हो गई थी। तीनों समाजवादी नेता थे मगर वहां समाजवाद की ताकत के रूप में नहीं बल्कि जातिवादी ताकत के रूप में इनकी पहचान बनी थी। लालू और मुलायम के बरअक्स शरद यादव की शुरुआत जातिगत समीकरणों के आधार पर नहीं हुई थी।

हला चुनाव उस जबलपुर से जीते थे जहां न यादव जनसंख्या थी और न ही उस समय तक यादवों का सशक्तिकरण शुरू हुआ था। वे छात्र युवा नेता के तौर पर जीते थे। समाजवाद से वे फिर भाजपा के समर्थक हुए और अपने आखिरी समय में कांग्रेस के।


राहुल गांधी ने उन्हें बहुत सम्मान दिया था। अपना राजनीतिक गुरु तक कहा था। मगर समाजवादियों और भाजपा की तरफ से उन्हें बहुत धक्का लगा था। नीतीश कुमार ने उन्हें जिस तरह पार्टी अध्यक्ष पद से हटाया वह उन्हें अंदर तक तोड़ गया था। बाद में लालू की पार्टी में शामिल हुए। मगर नीतीश द्वारा किए गए अपमान से वे उबर नहीं पाए। 

गौरतब है कि गुरुवार रात गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में शरद यादव ने अंतिम सांस ली। वे 75 वर्ष के थे। शरद यादव किडनी की समस्या से जूझ रहे थे। गुरुवार को कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल लाया गया था।

उनके निधन की खबर उनकी बेटी सुहासिनी ने सोशल मीडिया पर दी थी। उनकी मौत की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें याद करते हुए शोक जताया।