भोपाल: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत 11 मार्च 2022 को वन विभाग द्वारा जन सहभागिता से वनों के संरक्षण हेतु जारी संकल्प को निरस्त कर दिया है। अब दो बदलावों के साथ दिग्विजय सिंह शासनकाल में 22 अक्टूबर 2001 को जारी हुये संकल्प को ही लागू कर दिया गया है।

दरअसल 11 मार्च 2022 को जारी संकल्प में कई त्रुटियां देखी गई तथा एक एनजीओ ने इस पर आपत्ति लेते हुये इसे लागू न करने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया था। इसीलिये यह संकल्प निरस्त कर पुराना संकल्प ही दो बदलावों के साथ लागू कर दिया गया है।

ये किये बदलाव:

एक, वर्ष 2001 के संकल्प में प्रावधान था कि वन सुरक्षा समिति को आवंटित वनक्षेत्र में कार्य आयोजना के प्रावधानों के अनुरुप काष्ठ कूप के अंतिम पातन से प्राप्त वन उत्पाद के 10 प्रतिशत एवं बांस कूप के पातन से प्राप्त वन उत्पाद का 20 प्रतिशत मूल्य, अनुपातिक विदोहन व्यय घटाकर समिति को प्रदाय किया जायेगा।

अब इसमें बदलाव कर प्रावधान किया गया है कि राज्य शासन के काष्ठ के विदोहन से प्राप्त होने वाले काष्ठ की बिक्री से प्राप्त राजस्व की 20 प्रतिशत राशि संयुक्त वन प्रबंध समिति को देने के निर्णय को वित्तीय वर्ष 2022-23 से लागू किया जायेगा।

दो, अब फारेस्ट राईट्स एक्ट यानि अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी वन अधिकारों को मान्यता अधिनियम 2006 के तहत अधिकारों का विनिश्चय करते हुये वन प्रबंधन का अधिकार समुदाय/ग्राम सभा को जिन स्थानों पर दिया जाता है, उन स्थानों पर उक्त कानून के प्रावधानों के अनुसार वनों का प्रबंधन होगा।