सुप्रीम कोर्ट ने महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पहलवानों के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है, कि अब इस पर आगे कोई सुनवाई नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि मामले में FIR दर्ज हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का उद्देश्य FIR को लेकर था जो दर्ज हो चुकी है। अब आप हाईकोर्ट जाइये।
वहीं मामले को लेकर दिल्ली पुलिस का कहना है, कि पहलवानों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं किया गया है। जंतर-मंतर में धरना स्थल पर फोल्डिंग बेड लाए गए। चूंकि अनुमति नहीं थी, इसलिए हमने इसकी अनुमति नहीं दी, इसलिए प्रदर्शनकारी पहलवानों के कुछ समर्थकों ने ट्रक से बिस्तर निकालने की कोशिश की और इस पर कहासुनी हो गई। हमने पहलवानों से कहा है कि वे अपनी शिकायतों पर शिकायत करें और उचित कार्रवाई करेंगे...जिस पुलिसकर्मी पर उन्होंने आरोप लगाए हैं, उनका मेडिकल चेकअप कराया जा रहा है।
पुलिस का पहना है, कि पुलिस ने केवल अपनी ड्यूटी निभाई है, धरना स्थल पर किसी भी तरह का बेड लाने की अनुमति नहीं थी, आप वहां बेड कैसे ला सकते हैं? दिन में किसी की एंट्री पर रोक नहीं है। रात में जबरन माहौल खराब करने का प्रयास किया गया, जिसका पुलिस ने विरोध किया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि बुधवार रात कोई पुलिस कर्मी नशे में नहीं मिला; पर्याप्त महिला कर्मी मौके पर तैनात थीं।
बृजभूषण सिंह के खिलाफ दर्ज किसी भी मामले में पुलिस को कोई गवाह नहीं मिला है। अब तक पुलिस ने धारा 161 के तहत 4 नाबालिग खिलाडिय़ों के बयान दर्ज किए हैं। सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य की जांच की जा रही है और बिना साक्ष्य के गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है।
दिल्ली पुलिस के व्यवहार से आहत पहलवान विनेश फोगट और बजरंग पूनिया ने गुरुवार को सरकार को अपने पदक और पुरस्कार लौटाने की पेशकश करते हुए कहा कि अगर इस तरह का अपमान किया जा रहा है तो इन सम्मानों का कोई फायदा नहीं है।
पहलवान 23 अप्रैल से राष्ट्रीय राजधानी में धरने पर बैठे हैं और एक नाबालिग सहित सात पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में डब्ल्यूएफआई प्रमुख और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।