Karnataka News: कर्नाटक में सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पिछली बीजेपी सरकार द्वारा बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को रद्द करने का फैसला किया है. इस मसले पर गुरुवार को राज्य कैबिनेट की ओर से एक प्रस्ताव पारित किया गया है.
राज्य के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के पाटिल ने कहा कि प्रस्ताव को आज राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है. पिछली बीजेपी सरकार ने पहले अध्यादेश के जरिए इसे लागू किया, फिर बाद में इसे सदन में लाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि कैबिनेट ने स्कूल की इतिहास की किताबों से केबी हेडगेवार से जुड़े चैप्टर को हटाने का फैसला किया है. उल्लेखनीय है कि केबी हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक थे. पिछले साल किताब में उनसे जुड़े चैप्टर शामिल किए गए थे.
बता दें कि धर्मांतरण विरोधी अधिनियम बसवराज बोम्मई सरकार द्वारा लाया गया था. बिल, जिसका उद्देश्य प्रलोभन, जबरदस्ती, बल, धोखाधड़ी के माध्यम से और बड़े पैमाने पर धर्मांतरण को रोकना था, जो कर्नाटक विधानसभा द्वारा दिसंबर 2021 में अपनाया गया था.
सरकार ने तब बिल को लागू करने के लिए एक अध्यादेश लाने का फैसला किया था. इस अध्यादेश को कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने 17 मई, 2022 को मंजूरी दी थी. इसके बाद इसे छह महीने के भीतर ही विधायिका द्वारा अनुमोदित करने की आवश्यकता थी.
बीजेपी बोली- सिद्धारमैया सरकार हिंदुओं के खिलाफ
फ़िलहाल, इस पर अब सियासत शुरू हो गई है. बीजेपी नेता कर्नाटक के पूर्व शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा कि कांग्रेस मुसलमानों के वोट चाहती हैं, सिद्धारमैया की सरकार हिंदुओं के खिलाफ है. वे हिजाब को फिर से पेश कर सकते हैं. वे अल्पसंख्यकों के वोटों को आकर्षित करना चाहते हैं और हर चीज का राजनीतिकरण करना चाहते हैं.