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धर्म की राजनीति को लेकर प्रदेश के दो बड़े नेताओं में वार पलटवार से सियासत गर्मा गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जहां कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के हिन्दू होने के बयान पर कटाक्ष किया था वहीं अब कमलनाथ ने सीएम के कटाक्ष पर पलटवार किया है। कमलनाथ ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर धर्म की राजनीति का आरोप लगाया है। 

कमलनाथ ने सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर मैंने मंदिर बनाया तो मैंने कभी उसकी पब्लिसिटी नहीं की है। यह मेरी भावना है। धर्म राजनीति का विषय नहीं बल्कि सब की निजी भावना है। धर्म को लेकर राजनीति करना सबसे बड़ा अपराध है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि मैं गर्व से कहता हूं मैं हिंदू हूं लेकिन बेवकूफ नहीं हूं। ना किसी को बेवकूफ बनाना चाहता हूं।

गौरतलब है कि कमलनाथ ने रविवार को अधिवक्ता सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए कहा था कि मैं हिंदू हूं लेकिन बेवकूफ नहीं हूं। जिस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि कमलनाथ जी को अब प्रमाण देना पड़ रहा है कि है कि वो हिंदू हैं। ये तो अटल जी पहले ही कह चुके हैं कि हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन और रग-रग हिंदू मेरा परिचय, और कमलनाथ जी को अब ये याद आ रहा है। 

इससे पहले गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी धर्म की राजनीति को लेकर कमलनाथ के साथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया था। नरोत्तम मिश्रा ने कमलनाथ और राहुल गांधी को इच्छाधारी हिंदू की उपमा दी थी। उन्होंने कहा था कि चुनाव आते ही इन लोगों को हिंदू होने की याद आती है। उन्होंने कमलनाथ पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि कमलनाथ ऐसे हिंदू हैं जब भगवान राम और राम सेतु का विषय आया था तब वो चुप थे। जब उनके मित्र द्वारा राम मंदिर की तारीख पर सवाल उठाए गए थे, उस वक्त भी कमलनाथ चुप थे।