सीबीआई की विशेष अदालत ने 31 साल पुराने 100 रुपये रिश्वत लेने के मामले में 82 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलवे क्लर्क को एक साल की सजा सुनाई है. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय विक्रम सिंह की अदालत ने वृद्धावस्था के आधार पर कम सजा की मांग करने वाले दोषी के प्रति कोई नरमी दिखाने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा करने से समाज में गलत संदेश जाएगा.
अदालत ने आरोपी राम नारायण वर्मा पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. वर्मा ने जज के सामने दलील दी कि घटना 22 साल पहले की है. इस मामले में पहली जमानत पर रिहा होने से पहले वह दो दिन जेल में बिता चुके हैं.
कोर्ट ने कम सजा की अपील कर दी खारिज-
उन्होंने तर्क दिया कि उनकी सजा जेल में पहले से बिताए समय तक सीमित हो सकती है ताकि उन्हें सजा काटने के लिए जेल न जाना पड़े. याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में दो दिन जेल में रहना काफी नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि अपराध की प्रकृति और रिश्वत की राशि के अन्य कारणों पर विचार करते हुए एक वर्ष का कारावास न्याय के उद्देश्य को पूरा करेगा.
सीबीआई ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा-
1991 में उत्तर रेलवे के सेवानिवृत्त लोको चालक राम कुमार तिवारी ने इस मामले में सीबीआई में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. तिवारी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनकी पेंशन की गणना के उद्देश्य से उनका मेडिकल परीक्षण आवश्यक था. इसके लिए आरोपी राम नारायण वर्मा ने 150 रुपये रिश्वत की मांग की थी. फिर बाद में उसने 100 रुपये की मांग की थी.
सीबीआई ने रिश्वत की रकम के साथ वर्मा को रंगे हाथों पकड़ा था. सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद वर्मा के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी. अदालत ने आरोपी के खिलाफ 30 नवंबर 2022 को आरोप तय किया था.