भोपाल: मप्र के मुरैना क्षेत्र में स्थित चंबल वन्यप्राणी सेंचुरी में राजस्थान के कोटा बैराज से तेज गति से पानी छोडऩे पर नदी किनारे रेत में दिये घडिय़ाल एवं कछुओं के अण्डे नष्ट हो गये हैं। इस स्थिति से निपटने के लिये मप्र के चीफ वाईल्ड लाईफ वार्डन जसबीर सिंह चौहान ने राजस्थान के सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर कहा है कि वे चंबल नदी में पानी तेज गति से न छोडक़र धीमी गति से छोड़ें।

उल्लेखनीय है कि ग्रीष्म ऋतु में ही घडिय़ाल एवं कछुये चंबल नदी के किनारे पर रेत में अपने अण्डे देते हैं। परन्तु इस बार राजस्थान के सिंचाई विभाग ने कोटा बैराज से सिंचाई आदि के लिये तेज गति से पानी छोड़ दिया। इसके कारण चंबल सेंचुरी में ये अण्डे नष्ट हो गये। मामले की जानकारी आने पर वहां के सिंचाई विभाग को धीमी गति से पानी छोडऩे का आग्रह किया गया है।

ज्ञातव्य है कि चंबल नदी तीन राज्यों में बहती है। इनमें मप्र के अलावा उप्र एवं राजस्थान भी है। चंबल नदी में पानी राजस्थान की ओर से ज्यादा आता है। चूंकि चंबल सेंचुरी जलीय वन्य प्राणियों के लिये मुफीद जगह है, इसलिये वहां वन्यप्राणी एक्ट के तहत राज्य का वन विभाग इनकी देखरेख करता है।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि चंबल सेंचुरी में कोटा बैराज से तेज गति से पानी छोडऩे के कारण घडिय़ाल एवं कछुओं के अण्डे नष्ट हुये हैं। आगे से ऐसा न हो और धीमी गति से पानी छोड़ा जाये, इसके लिये राजस्थान के सिंचाई विभाग को पत्र लिखा गया है।