भोपाल: बैतूल नेशनल हाइवे से लगे बैतूल रेन्ज के जंगल को एक बार फिर माफिया ने निशाना बनाया है. बारिश के पहले इस तरह आरे से सागौन पेडों को काटने से विभाग में हड़कंप मच गया है. उत्तर वन मण्डल के डीएफओ ने एक जांच दल गठित कर रिपोर्ट मांगी थी जिसमे वन माफिया के सक्रिय होने के पुख्ता प्रमाण मिले है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर वन मंडल की बैतूल रेंज अंतर्गत अर्जुनगोंदी सर्किल के कक्ष क्रमांक 247 खैरी बीट में 4 दिन पूर्व 2 दर्जन से ज़्यादा सागौन पेड़ो को आरे से काट कर मुख्य हिस्सा को ले जाने में सफल रहे है. हालांकि विभाग यह मानने को तैय्यार नही है कि वन माफिया सागौन लकड़ी ले जाने में सफल हुए है. वह अधिकारियों के मुताबिक लकड़ी छोड़ कर भाग गए है.

सूत्र बताते है कि शाहपुर क्षेत्र के पाठई निवासी अन्तर्राजिय वन माफिया का यह कारनामा है. सूत्रों की माने तो वन माफिया ने पाढर रोड के ढाबे पर पहले से ही कंटेनर खड़ा करवा दिया था. आरे से 8 फ़ीट लम्बाई टुकड़े कर के उन्हें बोरे में लपेटकर कर कंटेनर में रख कर रात को रवाना किया गया था.  

उत्तर वन मण्डल के डीएफओ राकेश कुमार डामोर में बताया कि हाल ही में शाहपुर क्षेत्र के पाठई का निगरानी शुदा वन माफिया जेल से छूटकर आया है. इसके पूर्व भी इसके द्वारा दूसरे डिवीजनों में भी इस तरह के मामलों को अंजाम दे चुका है इसका नेट वर्क इंटर स्टेट है. बीते दिनों इस पर बड़ी कार्यवाही हुई थी और जेल भेजा गया था छूटने के बाद दोबारा सक्रिय हो गया है. अवैध वन कटाई की सूचना मिलने पर दल रवाना हो गया.

120 से 150 गोलाई तक के 26 पेड़ काटे गए थे. लेकिन वन कर्मियों के मौके पे पहुंचते ही वन माफिया भागने में सफल  हो गए थे. डामोर ने बताया की सीसीएफ एके सिंह के निर्देश पर एक जांच दल बनाया गया है. जिसकी रिपोर्ट के आने के बाद वन कर्मियों की ज़िम्मेदारी तय की जाएगी. इधर माफिया की पतारसी के लिए अलग अलग टीम बनाई है जो तलाश में जुटी हुई है.

टिंबर माफियाओं के लिए बैतूल सबसे अधिक मुफीद-

बैतूल में उत्तम क्वालिटी की सागौन के वृक्ष पाए जाते हैं. महाराष्ट्र सीमा से लगे होने के कारण टिंबर माफियाओं के लिए बैतूल सबसे अधिक मुफीद माना जाता है. माफिया और बन कर्मियों का नेटवर्क भी सबसे अधिक मजबूत है. यही कारण है कि इसके पहले अंडरग्राउंड आरा मशीन भी बैतूल में पकड़ी गई थी.

न्यायालय में आरा मशीन स्थापित करने वाला आरोपी के खिलाफ वन अधिकारियों द्वारा ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के कारण वह कोर्ट से बरी हो गया. सूत्रों ने बताया कि चेंबर माफिया के एसडीओ से लेकर रेंजर तक के अधिकारियों का एक ताकत है जो सागौन की तस्करी में संलग्न है.