नपा अध्यक्ष का चुनाव..सीधे जनता नहीं करेगी।
मध्यप्रदेश में महापौर के जैसे नगर पालिका अध्यक्षों का चुनाव भी सीधे जनता से कराए जाने की मांग फिलहाल हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट का कहना है कि अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव पर अंतरिम रोक नहीं लगाई जा सकती है। इस मामले में नियमित कोर्ट खुलने के बाद सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस डीके पालीवाल की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई ग्रीष्मावकाश के बाद नियमित बेंच में होगी। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे ने हाईकोर्ट में ये याचिका दायर की थी। इसमें राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें सीधे जनता से सिर्फ नगर निगम के महापौर का चुनाव कराने का निर्णय लिया गया था।
याचिका में मांग की गई है कि महापौर की तरह ही नगर पालिका के अध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष यानी सीधे जनता से कराया जाए। कोर्ट में पक्ष रखा गया कि राज्य सरकार ने नगर पालिक अधिनियम की धारा-नौ में संशोधन कर नगर निगम के महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का निर्णय लिया है। वहीं सरकार ने नगर पालिका के अध्यक्ष का चुनाव चुने गए पार्षदों से कराने का निर्णय लिया है और इस संबंध में अध्यादेश जारी कर दिया है। जबकि नगर पालिका अध्यक्ष और महापौर की कार्यप्रणाली में कोई अंतर नहीं है।
याचिका में राज्य सरकार के इस कदम को भेदभावपूर्ण बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब कार्यप्रणाली में भेदभाव नहीं तो चुनाव प्रणाली में अंतर क्यों? हालांकि कोर्ट ने याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर चुनाव पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब ये साफ हो गया है कि प्रदेश की 99 नगर पालिका के अध्यक्ष पद का चुनाव चुने हुए पार्षद ही करेंगे। इधर प्रदेश में 16 नगर निगम में महापौर का चुनाव सीधे जनता करेगी।