भोपाल: राज्य शासन ने किसी वन अपराध में वनोपज, समस्त औजार, नाव, वाहन, रस्सी, जंजीर या अन्य किसी वस्तुओं को राजसात करने की कार्यवाही संरक्षित वन क्षेत्रों जिसमें अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान एवं टाईगर रिजर्व तीनों शामिल हैं, में पदस्थ फोरेस्ट अधीक्षक एवं सहायक संचालक को भी अधिकृत कर दिया है। इससे पहले सिर्फ सहायक वन संरक्षक को ही यह अधिकार था।

इसी प्रकार, राजसात करने की कार्यवाही के विरुध्द अपील सुनने के लिये संबंधित संरक्षित वन के क्षेत्र संचालक/संचालक को अधिकृत किया गया है। पहले वन संरक्षक को अपील सुनने का अधिकार था। इसके लिये राज्य के वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 52 के तहत उक्त प्राधिकारी नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है।