भोपाल: प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में शामिल गांवों की रिक्त भूमियां अब नजूल भूमि (सरकारी भूमि) कहलायेगी तथा इसका विक्रय नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश 2020 के तहत किया जायेगा। इसके लिये राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने सभी जिला कलेक्टरों को नये निर्देश जारी किये हैं।

जारी निर्देशों में कहा गया है कि ग्राम की आबादी भू-भाग या ग्राम के लिए निस्तार पत्रक में आरक्षित भूमियों के नगरीय क्षेत्र में सम्मिलित हो जाने के बाद ऐसे भू-भाग जो नगरीय निकाय के गठन अथवा विस्तारण के समय किसी ग्राम की आबादी का भाग रहा है, ऐसे भू-भाग में यथास्थिति निकाय के गठन या विस्तारण की दिनांक या उसके पूर्व से आबादी में गृहस्थल धारण करने वाला व्यक्ति या उनके उत्तराधिकारी अथवा उत्तरवर्ती, भूमिस्वामी हैं। नगरीय क्षेत्र में सम्मिलित ग्राम की आबादी का ऐसा भू-भाग जो रिक्त है, रिक्त आबादी भूमि नजूल भूमि निर्वर्तन निर्देश, 2020 के अनुसार नजूल भूमि है।

निर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक ग्राम के लिये तैयार किये गये निस्तार पत्रक में कतिपय भूमियां विशिष्ट प्रयोजनों के लिये आरक्षित हैं। ऐसे ग्राम जो नगरीय क्षेत्र के विस्तारण की अधिसूचना के प्रभाव में नगरीय क्षेत्र में शामिल हो गये हैं. अब संहिता के प्रावधानों के अनुसार ग्राम नहीं है, बल्कि धारा 104 की उपधारा (3) के अनुसार सेक्टर हैं और सेक्टर में निस्तार पत्रक प्रभावशील नहीं है। लोक प्रयोजनों के लिये भूमि पृथक रखे जाने की शक्ति कलेक्टर को प्राप्त है।

उनसे यह अपेक्षित है कि वह ऐसे ग्राम, जो नगरीय क्षेत्र में समाहित होकर सेक्टर बन गये हैं, में स्थित भूमियों की समीक्षा करें और उनमें से नगरीय क्षेत्रों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लोक प्रयोजनों के लिये भूमि आरक्षित करते हुए शेष भूमि भू-अभिलेख में दखलरहित (नजूल) भूमि के रूप में अंकित करायें तथा उपरोक्त कार्यवाही करते समय नगरीय क्षेत्र में स्थित अन्य दखलरहित (नजूल) भूमि को भी में लेते हए नगरीय क्षेत्र की आवश्यकताओं की पूर्ति हेत समग्र रूप से योजना तैयार कर लोक प्रयोजनों के लिये भूमि आरक्षित करें।