बेटी को दिला रहे मार्शल आर्ट ट्रेनिंग
सीहोर: सीहोर के कलेक्टर आईएएस चंद्रमोहन ठाकुर ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और समाज के लिए मिसाल पेश की है। मार्शल आर्ट्स के मुरीद कलेक्टर चंद्रमोहन ब्लेक बेल्ट के लिए रोज 2 घंटे पसीना बहाते हैं। उनका मानना है कि मार्शल आर्ट एक ऐसा खेल है जिसमें हम विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मरक्षा कर सकते हैं। उनकी यह सोच भी है कि जिस तरह से महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं उसे कम करने का सबसे अच्छी तरीका यह है कि छोटी उम्र में ही उन्हें मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दिला दी जाए। मार्शल आर्ट की इन खूबियों का कलेक्टर केवल बखान ही नहीं करते बल्कि उन्होंने खुद इसकी ट्रेनिंग ली। सबसे खास बात यह है कि स्टूडेंट बनकर 2 घण्टे की कठोर ट्रेनिंग लेकर वे मार्शल आर्ट्स की पहली यलो बेल्ट प्राप्त कर चुके हैं।

इतना ही नहीं, आत्मरक्षा के लिए वे अपनी बेटी अभिलाषा को भी मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दिलवा रहे हैं। महज 8 साल की उम्र में ही कलेक्टर की बेटी अभिलाषा कठिन दांव पेंच सीख चुकी है। वे जब अपनी बेटी को लेकर शहर की एक मार्शल आर्ट्स अकादमी पहुंचे थे तो उन्होंने खुद भी इसकी ब्लैक बेल्ट की परीक्षा उत्तीर्ण करने का संकल्प ले लिया। इसी के साथ उन्होंने मार्शल आर्ट्स अकादमी में एक विद्यार्थी के रूप में अपनी बेटी के साथ हर रोज मेहनत कर 2 घण्टे पसीना बहाना शुरू कर दिया।

देश की सबसे हाई प्रोफाइल और कठिन मानी जाने वाली भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास करने वाले चंद्रमोहन ठाकुर 2012 बैच के आईएएस हैं। वे बताते हैं कि उन्हें लगता था कि मार्शल आर्ट्स में ब्लैक बेल्ट प्राप्त करना चाहिए। सीहोर में कलेक्टर बनकर आया तो यह स्वप्न पूरा करने का मुझे मौका मिल गया। यही कारण है कि बेटी के साथ वे इस विधा से तत्काल जुड़ गए। वे अपने जीवन की पहली यलो बेल्ट की परीक्षा उत्तीर्ण भी कर चुके हैं और इसके लिए खासी खुशी भी जताते हैं। मार्शल आर्ट्स अकादमी के संचालक भी सीहोर कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर की मेहनत और संकल्प की सराहना करते हैं। अकेडमी के संचालक का कहना है कि कलेक्टर जैसे बड़े पद पर बैठकर, इतनी व्यस्तताओं के बीच भी मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग के लिए वे घंटों पसीना बहा रहे हैं। इससे यह संदेश भी सामने आ जाता है कि वाकई सीखने की कोई उम्र नहीं होती।