भोपाल. गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के फैसले ने मध्यप्रदेश के उत्पादकों और निर्यातकों को भले ही निराश किया लेकिन इससे आमजन को राहत मिलने लगी है। गेहूं की बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह प्रतिबंध लगाए गए हैं और इसका असर भी दिखने लगा है. प्रदेश में गेहूं की कीमत में औसतन 200 रुपए प्रति क्विंटल तक की कमी आ चुकी है और आनेवाले दिनों में गेहूं के दाम और घटने की संभावना है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 13 मई को जारी एक अधिसूचना में कहा कि इस अधिसूचना की तारीख को या उससे पहले जारी किए गए अपरिवर्तनीय ऋण पत्र (एलओसी) निर्यात शिपमेंट की अनुमति दी जाएगी। इस पर मप्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि प्रतिबंध से प्रदेश में निर्यातकों, व्यापारियों से लेकर किसानों तक की पूरी श्रृंखला प्रभावित होगी। मामले में सरकारी अधिकारियों का कहना कि उन्हें अभी इसकी आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। लेकिन इस फैसले का दो प्रकार से असर होगा। पहला, गेहूं की कीमतें कम होंगी और दूसरी, राज्य ये गेहूं निर्यात की संभावना समय से पहले ही खत्म हो जाएंगी। ज्ञातव्य है कि मिस्र, दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों ने एमपी के गेहूं में रुचि दिखाई है।
हालांकि पंजीकृत किसानों के पास सरकार को गेहूं बेचने का विकल्प होगा। आशा लगाई गई थी कि निर्यात प्रतिबंध के बाद गेहूं की कीमतों में गिरावट आएगी. इससे निजी व्यापारियों को आकर्षक कीमतों पर गेहूं बेचने वाले किसानों को भारी नुकसान होगा। इस बार गेहूं उत्पादक एमएसपी से कई गुना ज्यादा ऊंचे दामों पर गेहूं बेच रहे थे। निर्यात पर प्रतिबंध के फैसले के बाद गेहूं की कीमतों में गिरावट आ भी गई है. मध्यप्रदेश की सबसे बडी मंडी इंदौर में जो वेरायटी 2500 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रही थी अब वही किस्म 2300 रुपए के भाव में बेची जा रही है. लोकवन, मालव राज, पूर्णा के अलावा प्रीमियम ब्रांड शरबती गेहूं के दाम भी कम हो चुकें हैं। व्यापारियों के अनुसार करीब दो सप्ताह में गेहूं के दामों में औसतन 200 रुपए की और कमी आ सकती है.