भोपाल: हेरीटेज लिकर महुआ अगले माह से बाजार में उपलब्ध हो जायेगी। राज्य सरकार ने स्व सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश के दो जिलों अलीराजपुर एवं डिण्डौरी में इसके प्लांट डलवाये हैं। इनमें अलीराजपुर का प्लांट से अगले माह उत्पादन शुरु हो जायेगा और बाजार में यह उपलब्ध हो सकेगी। डिण्डौरी में यह प्लांट एक माह बाद शुरु हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि इस साल की आबकारी व्यवस्था में राज्य सरकार ने हेरीटेज लिकर के अंतर्गत महुआ की शराब का प्रावधान किया हुआ है। इससे पहले महुआ से बनी शराब ग्रामीण क्षेत्रों खसतौर पर आदिवासी वर्ग ही अपने उपभोग के लिये बना रहा था। कई बार इस महुआ शराब की उपलब्धता आम लोगों को भी हो जाती है।
पहली बार राज्य सरकार ने इसे हेरीटेज लिकर के अंतर्गत लाया है और स्व सहायता समूहों के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसके दो प्लांट अलीराजपुर एवं डिण्डौरी जिलों में लगवाये हैं। इन प्लांटों को लगाने के लिये आदिवासी कल्याण विभाग ने इन स्व सहायता समूहों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। इन प्लांटों से आबकारी प्रावधानों के अनुसार, महुआ शराब का निर्माण होगा और इसकी बाजार में उपलब्धता होगी।
खमीर की फैक्ट्री लगेगी :
राज्य का आबकारी विभाग हेरीटेज लिकर महुआ के लिये खमीर यानि यीस्ट बनाने की फैक्ट्री भी डलवा रहा है। इसके लिये उसने इच्छुक फर्मों एवं कंपनियों से एक्सप्रेशन ऑफ इन्ट्रेस्ट मांगे हैं। इस फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता 1100 किलोग्राम यानि प्रतिदिन 365 किलोग्राम की होगी। उल्लेखनीय है कि बिना खमीर के महुआ की शराब नहीं बन पाती है।
विभागीय अधिकारी का कहना है कि हेरीटेज लिकर के अंतर्गत महुआ से बनी शराब के दो जिलों में प्लांट लगवाये गये हैं जिनमें से एक प्लांट से अगले माह उत्पादन शुरु हो जायेगा। महुआ की शराब में लगने वाले खमीर के उत्पादन के लिये भी एक फैक्ट्री को लायसेंस दिया जायेगा जिसके लिये ईओआई जारी किया गया है।