राहुल सर की कैरियर कोचिंग को कांग्रेस गैर राजनीतिक प्रयास बता रही है. भारत का एजुकेशन सिस्टम आजादी के बाद खड़ा हुआ है. राहुल सर यह बताना भूल गए कि इस सिस्टम को खड़ा करने में कांग्रेस और उनके पुरखों का कितना योगदान रहा है. 

    सिस्टम में कमजोरी हैं, एजुकेशन सिस्टम लूट-खसोट का जरिया बन गया है. परीक्षा के पेपर लीक होते हैं. स्टूडेंट के सामने समस्याओं का अंबार है. जरूरत और उपलब्धता में जमीन आसमान का अंतर है. परीक्षा में बैठने वाले लाखों की संख्या में हैं और सीटें हजारों में हैं. सिलेक्शन योग्य विद्यार्थियों का ही होगा. जितने परीक्षा में बैठेंगे सब तो सफल नहीं हो सकते हैं. राहुल सर यही बता रहे हैं कि अगर हजार स्टूडेंट परीक्षा में बैठते हैं तो बारह विद्यार्थियों को वैतनिक रोजगार मिलता है. वह यह भी कह रहे हैं, कि जो रोजगार से छूट जाते हैं, वह नशे की लत से जुड़ जाते हैं.

    एजुकेशन सिस्टम सिलेक्शन का नहीं रिजेक्शन का बन गया है. राहुल सर यह सही कह रहे हैं कि विद्यार्थियों को उनके सपने पूरे करने के बजाय एजुकेशन सिस्टम डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, आईपीएस बनने के लिए ही प्रेरित करता है. कोई डांसर बनना चाहता है, लेकिन सिस्टम उसे डॉक्टर और इंजीनियर बनाने में लग जाता है. हर विद्यार्थी यूनिक है, उसकी किसी से तुलना नहीं हो सकती. उसकी क्षमता और सपने उसके अपने हैं.

    यह समस्या केवल विद्यार्थियों के सामने नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र इसी से पीड़ित है कि वह जो बनना चाहता है, जो उसका सपना है, उसके विपरीत परिवार समाज या एजुकेशन सिस्टम उसे अपनी प्रणाली में कुछ खास क्षेत्र में जाने के लिए ही मजबूर कर देता है.

    राहुल सर इस प्रक्रिया को क्राइम कह रहे हैं. उनकी यह बात इसलिए सही मानी जा सकती है, क्योंकि वह स्वयं राजनीति में नहीं आना चाहते थे. उन्होंने कई बार कहा कि राजनीति जहर है. फिर भी उनका जन्म ऐसे परिवार में हुआ जो पीएम की विरासत का परिवार है. स्वाभाविक है कि जिस परिवार में तीन प्रधानमंत्री रह चुके हों, वह अपने वारिस को भी वहीं पहुंचाने का सपना देखता हो. 

    राहुल सर देश के नेता प्रतिपक्ष हैं. उनके पास लंबा राजनीतिक अनुभव है. पीएम की विरासत उनके साथ जुड़ी हुई है. एजुकेशन सिस्टम में खामी हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है. अब तक कम से कम राहुल गांधी की तरफ से ऐसा कोई विकल्प देश के सामने पेश नहीं किया गया है जो एजुकेशन सिस्टम में सुधार के लिए हो. कोटा की कैरियर कोचिंग में भी उन्होंने केवल समस्याओं पर फोकस किया है, उनके समाधान के लिए कोई विकल्प प्रस्तुत नहीं किया है. 

    जो नीट की परीक्षा में शामिल होने की अंतिम समय में तैयारी कर रहा है, उसे प्रतिस्पर्धा की विशालता और सफलता के प्रतिशत का पूरा अनुमान है. अगर राहुल सर यह कहना चाहते हैं, कि  एजुकेशन सिस्टम ऐसा हो कि सभी को वैतनिक रोजगार मिले तो फिर युवाओं की संख्या के अनुपात में अवसरों की संख्या निर्मित करनी पड़ेगी. क्या किसी भी देश के लिए यह संभव है. 

     कांग्रेस जिसका वह नेतृत्व कर रहे हैं, उसमें राहुल सर का कोई प्रतिद्वंदी नहीं है. अगर कोई दिखता है तो वह पार्टी में रह नहीं सकता है. जब तक प्रतिस्पर्धा में चुनौती को पार कर कोई उपलब्धि हासिल ना की जाए तब तक योग्यता भी नहीं स्थापित होगी

    हर विद्यार्थी राहुल गांधी बनना चाहता है. राहुल गांधी जैसी परिस्थितियों का वह सपना देखता है. सपने पूरे करने के लिए मेहनत भी करता है, लेकिन कोई कितनी भी मेहनत कर ले बिना विरासत के राहुल सर जैसी स्थिति पूरी दुनिया में किसी को भी हासिल नहीं हो सकती है.

    देश का एजुकेशन सिस्टम वर्तमान जरूरत के मुताबिक बदलने की जरूरत है. सस्ती और सबके लिए शिक्षा जरूरी है. देश में आज भी शत प्रतिशत साक्षरता नहीं है. जो एजुकेशन सिस्टम अभी प्रभावशील है वह 10-12 सालों में नहीं खड़ा हुआ है. इसकी बुनियाद आजादी के बाद ही शुरु हुई थी. निश्चित रूप से पहले प्रधानमंत्री से लेकर अब तक देश में रहे सारे प्रधानमंत्रियों ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिएअपना योगदान दिया. अस्सी साल के भारत में साठ साल जिस विरासत ने देश के सारे सिस्टम को खड़ा और मजबूत किया, उसी विरासत का वारिस आज युवा संवाद में यह स्थापित कर रहा है, कि एजुकेशन सिस्टम विद्यार्थियों का शोषण कर रहा है. विद्यार्थियों के साथ एक तरह से क्राइम हो रहा है. एजुकेशन सिस्टम में बेइंतिहां कमाई और लूट हो रही है.    

    कोचिंग एजुकेशन सिस्टम का पार्ट नहीं है, लेकिन वर्तमान में यही सिस्टम का फेस बन गया है. खान सर जैसे कोचिंग गुरु काफी चर्चित हो रहे हैं. राहुल सर की कैरियर कोचिंग युवा विद्यार्थियों के लिए कितनी लाभप्रद होगी यह तो नहीं पता लेकिन कांग्रेस इसमें अपना लाभ जरूर तलाश रही है. राहुल सर तो भारतीय शिक्षा व्यवस्था से पढ़कर भी नहीं निकले हैं. उन्होंने तो विदेशों में शिक्षा ग्रहण की है. फिर भी एजुकेशन सिस्टम की कमियों से वाकिफ़ हैं.

    राहुल सर की पार्टी की जिन राज्यों में सरकार है, कम से कम उन राज्यों में तो एजुकेशन सिस्टम की खामियां दूर होंगीं. एक ऐसा मॉडल सामने आएगा जिसको देखकर हर सरकार को सुधार के लिए मजबूर होना पड़ेगा. युवाओं को भ्रांति नहीं है. युवाओं में क्रांति से ही सत्ता बदलती है.