पति-पत्नी का रिश्ता प्रेम और विश्वास का होता है। ये एक ऐसा रिश्ता है, जिसे हम खुद चुनते हैं। हमें जन्म से माता-पिता भाई बहन तो मिलते हैं, लेकिन अपना जीवन साथी हम स्वयं ही चुनते हैं और यही जीवनभर का बंधन बन जाता है। आपने ज्योति मौर्या के केस के बारे में तो सुना होगा। जिन्होंने SDM बनने के बाद अपने पति से किनारा कर लिया।
छतरपुर की प्रियंका उनसे बिलकुल इतर हैं, जो अब समाज के लिए आदर्श बन गई हैं। प्रियंका 5 साल अपने पति को गोद में लेकर दर-दर भटक रही हैं। मामला छतरपुर जिले के लवकुश नगर क्षेत्र के ग्राम परसानिया का है जहां की रहने वाली प्रियंका आदिवासी की शादी वर्ष 2017 में अंशुल गौड़ से हुई थी।
22 फरवरी 2019 को सड़क हादसे में घायल हो गए थे उनके पैर और कमर में गंभीर चोटें आई थीं, तभी से वह चलने फिरने में असमर्थ हैं और सर्वाइकल स्पाईन (लकवा) की बीमारी से ग्रस्त हैं। तभी से पत्नी अपने दिव्यांग पति को लेकर जिम्मेदारों की चौखट पर मदद की गुहार लगाने पहुंच रही है।
जी हां पिछले 5 साल से प्रियंका अपने पति अंशुल गौड़ को गोद में उठाकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। आर्थिक तंगी से परेशान प्रियंका अपने पति को लेकर लगातार मदद की गुहार लगा रही है हालत और परिवार की स्थिति सुधारने के लिए एक महिला लगातार जंग लड़ रही है। पर उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा।
हाल ही में मदद की आस लिए प्रियंका अपने विकलांग पति को गोद में उठाकर जनसुनवाई में पहुंची। जहां जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने मदद का आश्वासन दिया है। छतरपुर जिला पंचायत में जनसुनवाई के दौरान प्रियंका यह कहती नज़र आईं कि मैं ज्योति मौर्या नहीं जो इस हालत में पति को छोड़ दूं.
लाखों रुपये कर्जा आर्थिक तंगी से परेशान गंभीर परिस्थिति में प्रियंका जैसे-तैसे जेवर बेचकर 1 लाख 30 हजार रुपये लेकर कानपुर पहुंची जहां न्यूरोन हॉस्पिटल में पति अंशुल आदिवासी का ईलाज करा रहीं थीं
वहाँ 1 माह 10 दिन भर्ती रहने के दौरान उनका सारा पैसा खर्च हो गया, और अब पैसा न हो पाने के कारण 9 जुलाई को वह छतरपुर अपने गांव वापिस आ गईं। प्रियंका और उनके पति पर लोगों का 3 लाख से ऊपर कर्जा भी हो गया है। जिसे पटा पाना मुश्किल हो रहा है ऊपर से इलाज के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।