MP Forest: कुनो नेशनल पार्क में पिछले 4 महीने में 8 चीता की मौत सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने चीतों की मौत से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई करते हुए टिप्पणियां की है कि चीतों को एक जगह क्यों रखा गया है. कोर्ट ने केंद्र को कुछ सकारात्मक कदम उठाने का सुझाव दिया.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को जवाब दिया कि वे इस परियोजना के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने अदालत को बताया कि स्थानांतरण पर होने वाली 50 प्रतिशत मौतें सामान्य हैं. 

अदालत ने इस मुद्दे को जानना चाहा कि क्या वे जलवायु के अनुकूल हैं? चीता किडनी अथवा श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं या नहीं? एएसजी ने जवाब दिया कि संक्रमण के कारण मौतें हो रही हैं. अदालत ने टिप्पणी की कि राजस्थान में एक अभयारण्य तेंदुओं के लिए जाना जाता है और अदालत को इस पहलू पर विचार करने का सुझाव दिया.

अब तक कितने चीतों की मौत-

- 27 मार्च को किडनी में संक्रमण के चलते चार साल की मादाचीता साशा की मौत.
- 23 अप्रैल को नर चीता उदय की हार्टअटैक से मौत हो गई थी. उसे बाड़े में लड़खड़ाकर अचानक बहोश होते देखा गया था.
- 9 मई को बाड़े में दो नर चीतों अग्नि और वायु के साथ संघर्ष में मादा चीता दक्षा की मौत हो गई थी.
- 23 मई को एक चीता शावक की मौत हुई. इसे सियाया (ज्वाला) चीता ने जन्मा था.
- 25 मई को ज्वाला के दो अन्य शावकों की मौत हुई.
- 11 जुलाई को चीता तेजस की मौत हो गई. इसे दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था.
- 14 जुलाई को चीता सूरज की मौत. इसे भी दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था.

पटरी से उतर गई चीता परियोजना-

भारत की चीता परियोजना पटरी से उतर गई है, क्योंकि इसे एक अभूतपूर्व संकट का सामना करना पड़ रहा है. इसका अनुमान चीता प्रबंधकों को भी नहीं था. हालाँकि गोपनीयता में लिपटी इस परियोजना में चीते की उच्च मृत्यु दर की कल्पना की गई थी, लेकिन मौतों के वर्तमान कारण का चीता कार्य योजना में कोई उल्लेख नहीं किया गया था. ठीक वैसे ही, जैसे राजनीति, नौकरशाही बाधाएं और लालफीताशाही सहित अन्य मुद्दे वर्तमान दुर्दशा के लिए जिम्मेदार हैं. 

इनमें से किसी का भी वन्य जीवन और पर्यावरण से कोई संबंध नहीं है. इन सबके बीच, अधिकारी और विशेषज्ञ परियोजना को पटरी पर लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. भारत सरकार अधिकारियों और राज्य अफसरों के बीच 'अहं' के जंग में चीता प्रोजेक्ट सफर कर रहा है. यही नहीं, एनटीसीए के सदस्य सचिव एसपी यादव और दक्षिण अफ्रीका पशु चिकित्सक डॉ. एड्रियन टॉर्डिफ के बीच भी समन्वय का अभाव है. 

इसका खुलासा है भी सूरज की मौत के बाद डॉ. एड्रियन टॉर्डिफ ने पत्रकारों से बातचीत करने के दौरान खुद की. डॉ टॉर्डिफ अंतरराष्ट्रीय चीता विशेषज्ञों के पांच परामर्श पैनलिस्टों में से एक हैं. लेकिन, ऐसा लगता है कि टॉर्डिफ़ को चीतों की ख़राब सेहत के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी. 

तेजस और सूरज की मौत के बाद उन्होंने एक दक्षिण अफ्रीकी समाचार वेबसाइट नेटवर्क24 के साथ अपनी भावनाएं साझा कीं. डॉ. एड्रियन ने खेद व्यक्त करते हुए कहा, 'ऐसा लगता है, मानो अब हम खुद को एक जटिल राजनीतिक खदान में पाते हैं.'